जानिए क्यों मनाया जाता है मोहर्रम, जिसके लिए इमाम हुसैन ने दी थी शहादत
shubhamsc | 10 Sep 2019 09:51 AM (IST)
इमान हुसैन के लिए कभी मोहम्मद साहब ने कहा था कि 'हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से'. इमाम हुसैन, पैगंबर मोहम्मद के छोटे नवासे थे. इमाम हुसैन और उनके साथियों को कर्बला में शहीद कर दिया गया था जिस वजह से मोहर्रम का त्यौहार मनाया जाता है. खुशी के त्यौहारों से उलट ये एक मातम का त्यौहार है. इमास हुसैन को याद करते हुए उर्दू के मशहूर शायर अल्लमा इकबाल ने ये कहा था.
क्या तमाशा हुआ इस्लाम की तकदीर के साथ,
कत्ल शब्बीर हुए नारा- ए-तकबीर के साथ..
लेकिन इस शहादत की वजह क्या थी
सीरिया के शासक यजीद की सारी हरकतें मोहम्मद साहब की दी गई सीखों के उलट थी. वो खुद को खलीफा घोषित करना चाहता था लेकिन उसे पता था की उसकी हरकतों की वजह से उसे कभी भी लोगों का भरोसा हासिल नहीं हो सकता है. तब उसने सोचा अगर मोहम्मद साहब के छोटे नवासे यानि हुसैन उसे खलीफा घोषित करते हैं तो लोगों को उस पर भरोसा हो जाएगा. लेकिन हुसैन ने यजीद के किसी भी फरमान को मानने से इनकार कर दिया. और वो अपने 72 साथियों के साथ हज करने के लिए मक्का शरीफ चल दिए. गुस्से में आकर यजीद ने अपने सैनिकों को भेष बदलकर हुसैन का कत्ल करने के लिए मक्का भेज दिया.
क्या तमाशा हुआ इस्लाम की तकदीर के साथ,
कत्ल शब्बीर हुए नारा- ए-तकबीर के साथ..
लेकिन इस शहादत की वजह क्या थी
सीरिया के शासक यजीद की सारी हरकतें मोहम्मद साहब की दी गई सीखों के उलट थी. वो खुद को खलीफा घोषित करना चाहता था लेकिन उसे पता था की उसकी हरकतों की वजह से उसे कभी भी लोगों का भरोसा हासिल नहीं हो सकता है. तब उसने सोचा अगर मोहम्मद साहब के छोटे नवासे यानि हुसैन उसे खलीफा घोषित करते हैं तो लोगों को उस पर भरोसा हो जाएगा. लेकिन हुसैन ने यजीद के किसी भी फरमान को मानने से इनकार कर दिया. और वो अपने 72 साथियों के साथ हज करने के लिए मक्का शरीफ चल दिए. गुस्से में आकर यजीद ने अपने सैनिकों को भेष बदलकर हुसैन का कत्ल करने के लिए मक्का भेज दिया.