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China ने चली चाल! India ने दिखाई आंख! खेल हुआ INTERNATIONAL! |ABPLIVE

ABP Live Focus  |  12 Jun 2026 01:59 PM (IST)
ABP News

भारत के manufacturing और tech sectors को हिला सकता है। चीन ने अभी एक नया critical mineral framework announce किया है, जो 15 जून से लागू होगा, और भारतीय importers अभी से इसकी चिंता में हैं। अब इसका crux समझिए: बीजिंग ने अब जरूरी minerals की सप्लाई को सीधे अपने national security objectives से जोड़ दिया है। यह सिर्फ एक policy tweak नहीं है—यह global critical mineral processing chain पर चीन के overwhelming dominance को formalise करता है। और आंकड़े चौंकाने वाले हैं: दुनिया के करीब 90% critical mineral processing पर चीन का नियंत्रण है तो सवाल है—इसका भारत पर क्या असर पड़ेगा? मैं आपको इसे आसान भाषा में समझाती हूं: सबसे पहले, price volatility। industry experts का कहना है कि इससे भारतीय importers के लिए कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। PwC India के मनस मजूमदार ने Economic Times को बताया कि भले ही चीन इसे “supply chain को stabilise” करने वाला कदम बता रहा हो, लेकिन असल में इससे भारत जैसे देशों पर उसकी supply control और मजबूत हो जाएगी दूसरा, supply shortage का खतरा। ICRA Ltd के के श्रीकुमार के मुताबिक, चीन का यह फैसला पूरे value chain में availability को सीमित कर सकता है, जिससे “supply shortages और margin pressures” का risk बढ़ेगा तीसरा, कौन से sectors सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे? automotive industry, खासकर electric vehicle manufacturers, electronics sector, और वे सभी industries जो rare earth elements, gallium, germanium और graphite पर निर्भर हैं—ये सभी सबसे ज्यादा दबाव में आएंगे। ये वही materials हैं जो semiconductors और batteries के लिए critical होते हैं अब core problems समझिए: भारत lithium, cobalt और nickel के लिए पूरी तरह imports पर निर्भर है, जबकि graphite के मामले में भी भारी निर्भरता है। दूसरी तरफ, global critical mineral processing का 90% कंट्रोल चीन के पास है तो भारत कैसे जवाब दे रहा है? Domestic Production पर फोकस बढ़ाया जा रहा है। ₹16,300 करोड़ का National Critical Mineral Mission, जिसे जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था, exploration को तेजी दे रहा है। Geological Survey of India (GSI) के तहत 368 projects चल रहे हैं, और 2030-31 तक 1,200 projects का लक्ष्य रखा गया है [3][4]। हालांकि ground reality यह है कि cobalt, nickel और lithium के लिए अभी तक कोई working mining lease मौजूद नहीं है

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