UPI Refund Rules: आज के दौर में लगभग हर कोई रोजमर्रा के कामों के लिए ऑनलाइन पेमेंट करता है. पिछले कुछ सालों में UPI ने पेमेंट का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. छोटे से लेकर बड़े ट्रांजैक्शन तक लोग बिना कैश के आसानी से पैसे भेज लेते हैं. लेकिन कभी-कभी नेटवर्क दिक्कत बैंक सर्वर डाउन और टेक्निकल प्रॉब्लम्स के चलते UPI पेमेंट फेल हो जाता है. कई बार पैसा अकाउंट से कट भी जाता है और रिसीवर तक पहुंचता भी नहीं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि रिफंड कब मिलेगा और नियम क्या कहते हैं. चलिए आपको बताते हैं इसके लिए क्या नियम बनाए गए हैं.
पेमेंट फेल होने पर रिफंड कितनी देर में आता है?
अगर UPI पेमेंट फेल हो जाए लेकिन अकाउंट से पैसा डेबिट हो गया हो, तो नियमों के मुताबिक रिफंड ऑटोमैटिक तरीके से बैंक द्वारा वापस किया जाता है. ज्यादातर केस में पैसा 24 घंटे के भीतर अकाउंट में लौट आता है. अक्सर यह रिफंड कुछ ही मिनटों में मिल जाता है. लेकिन बैंक सर्वर पर लोड ज्यादा हो तो थोड़ा समय लग सकता है.
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आपको अलग से बैंक या फिर ऐप में कोई कंप्लेंट नहीं करनी पड़ती. क्योंकि पूरा प्रोसेस NPCI की रीकोन्सिल सिस्टम के जरिए खुद होता है. अगर 24 घंटे के बाद भी पैसा न लौटे. तब आप UPI ऐप के हेल्प सेक्शन में जाकर ट्रांजैक्शन आईडी डालकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं. बैंक की ओर से इस शिकायत करने के बाद 3 से 5 वर्किंग डेज में रिफंड दे दिया जाता है.
ऐसे ट्रांजैक्शन में देरी ज्यादा होती है
कई बार पेमेंट तो फेल दिखता है लेकिन बैंक की तरफ से स्टेटस पेंडिंग में अटक जाता है. ऐसे मामलों में रिफंड आने में थोड़ा ज्यादा वक्त लग सकता है. क्योंकि बैंक पहले ट्रांजैक्शन को क्लियर स्टेटस में लाता है और फिर रिवर्स करता है. अगर ट्रांजैक्शन किसी अलग बैंक वाले यूजर को भेजा जा रहा हो. तो दो बैंकों के सर्वर के बीच सिंकिंग में समय लग सकता है. इसके साथ ही रात के समय या बैंक की मेंटेनेंस विंडो में किए गए ट्रांजैक्शन में देरी होती है. अगर ऐप बार-बार फेल दिखा रहा हो. तो पेमेंट लगातार ट्राइ न करें, क्योंकि इससे सिस्टम में एरर बढ़ जाता है और रिफंड में और देरी हो सकती है.
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अगर फिर भी पैसा न लौटे तो क्या करें?
अगर 24 घंटे और उसके बाद बैंक की तय समय सीमा में भी पैसा वापस नहीं आता. तो आप UPI ऐप, बैंक ब्रांच या बैंक कस्टमर केयर से सीधे बात कर सकते हैं. ट्रांजैक्शन नंबर, ट्रांजैक्शन का वक्त और ट्रांजैक्शन अमाउंट की जानकारी देने पर बैंक केस को ट्रैक करता है. NPCI के नियमों के मुताबिक ऐसे केस को अनदेखा नहीं किया जाता और बैंक को जल्द से जल्द रिफंड देना ही होता है. इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है.
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