NPS UPS 8th Pay Commission: 8वां केंद्रीय वेतन आयोग 50.14 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनभोगियों के वेतन और पेंशन ढांचे पर विचार कर रहा है. ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार कर्मचारी संगठनों की ओर से मांगे गए ऊंचे फिटमेंट फैक्टर को मान पाएगी.

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हालांकि कर्मचारी यूनियनें 3 से लेकर 5 से ज़्यादा तक के फिटमेंट फ़ैक्टर की मांग कर रही हैं, लेकिन पेंशन एक्सपर्ट्स का दलील है कि ऐसी मांगें वित्तीय हकीकत के मुताबिक नहीं हो सकती हैं.  ऐसा खासकर इसलिए है क्योंकि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी कॉन्ट्रिब्यूटरी पेंशन स्कीमों के तहत सरकार की देनदारियां बढ़ रही हैं.

ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन के प्रेसिडेंट और पेंशन एक्सपर्ट मंजीत सिंह पटेल के अनुसार, केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ़ ज़्यादा सैलरी के लिए फंड का इंतज़ाम करना ही नहीं है, बल्कि उससे जुड़े पेंशन-संबंधी योगदान में होने वाली बढ़ोतरी को पूरा करना भी है.

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सैलरी में वाजिब बढ़ोतरी

सिंह ने कहा, अगर सरकार दो के आस-पास का फिटमेंट फ़ैक्टर भी देती है, तो भी कुल सैलरी खर्च में काफ़ी बढ़ोतरी हो सकती है. मिसाल के तौर पर किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है और उसे अभी 60% महंगाई भत्ता DA मिलाकर हर महीने ₹160 मिलते हैं. अगर रिवाइज्ड फिटमेंट फैक्टर के ज़रिए बेसिक पे को दोगुना करके ₹200 कर दिया जाता है, तो कर्मचारी की सैलरी मौजूदा ₹160 से ₹40 बढ़ जाएगी, जिसका मतलब है कि असल में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी. इससे पता चलता है कि अगर फिटमेंट फैक्टर कर्मचारी संगठनों की मांग से काफी कम भी हो, तो भी सरकारी खर्च में भारी बढ़ोतरी हो सकती है. सिहं के मुताबिक, 'अनुमान है कि सरकार पर 2 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का बोझ पड़ेगा'.

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सरकार का बढ़ता खर्च

मिली जानकारी के मुताबिक, भारत में करीब 55 लाख केंद्रीय सरकारी कर्मचारी और संभावित 69 लाख पेंशनभोगी हैं, जिन पर 8वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों का असर पड़ेगा. 7वें CPC ने कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह कर दिया था. एक्सपर्ट सिंह के मुताबिक, 8वें CPC के लिए चुनौती सिर्फ़ सैलरी में बदलाव तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि केंद्र सरकार लाखों कर्मचारियों की रिटायरमेंट स्कीम में भी योगदान देती है. सैलरी बढ़ने के साथ-साथ पेंशन स्कीम में भी योगदान बढ़ेगा, क्योंकि ये कर्मचारियों की बेसिक पे और महंगाई भत्ते से जुड़े होते हैं.

उन्होंने कहा, केंद्र सरकार के मौजूदा कर्मचारियों में से लगभग 32-33 लाख कर्मचारी NPS के दायरे में आते हैं. इसमें वे अपनी बेसिक सैलरी और DA का 10 प्रतिशत हिस्सा जमा करते हैं, जबकि सरकार 14 प्रतिशत का योगदान देती है. सरकार पहले से ही NPS खातों में हर महीने करीब 3,000 करोड़ रुपये जमा कर रही है. UPS कर्मचारियों के मामले में, सरकार 18.5 प्रतिशत का योगदान देती है, जिससे 40,000 रुपये की बेसिक सैलरी में 6,660 रुपये ज्यादा जुड़ जाते हैं.

इसका मतलब है कि 8वें वेतन आयोग के लिए सिर्फ़ सैलरी और पेंशन बढ़ाना ही अहम बात नहीं है. इसके अलावा, सरकार को 55 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए 14% NPS और 18.5% UPS कटौती की देनदारी का बोझ भी उठाना होगा. यह एक बड़ा हिस्सा है.

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