Electric Bill New Rules: अब हमारे देश में बिजली बिलिंग का तरीका जल्द ही पूरा तरह से बदलने वाला है. जहां, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने देश भर में बिजली टैरिफ के ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत बिजली कंपनियों का 'फिक्स्ड चार्ज' बढ़ाने का फैसला लिया गया है. आसान शब्दों में कहा जाए तो आप कम बिजली खर्च करें, आपको हर महीने एक तय मोटी चुकानी होगी. 

Continues below advertisement

आखिर क्यों लिया जा रहा है यह बड़ा फैसला?

दरअसल, सरकारी बिजली वितरण कंपनियों (Discoms) की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए यह बेहद ही महत्वपूर्ण फैसला लिया गया है. जहां, हाल की स्थिति के बारे में बात की जाए तो,  कंपनियां ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रिड मेंटेनेंस और कर्मचारियों की सैलरी जैसे अपने कुल फिक्स्ड खर्चों का सिर्फ और सिर्फ 10 से 20 प्रतिशत ही फिक्स्ड चार्ज के माध्यम से ली जाती है. लेकिन, उनका असल में फिक्स्ड खर्च 38 से 58 प्रतिशत तक ही होता है. 

Continues below advertisement

आशा कार्यकर्ताओं को 3000, आंगनवाड़ी शिक्षकों को 1000, महिलाओं को फ्री बस सफर... इस राज्य ने किए बड़े ऐलान

क्या सोलर सिस्टम से कंपनियों की घटी है कमाई?

इतना ही नहीं, फैक्ट्रियों द्वारा रूफटॉप सोलर सिस्टम अपनाने से कई कंपनियों की प्रति-यूनिट कमाई भी अब घटती हुई नजर आ रही है. जहां, ये उपभोक्ता बिजली तो सोलर से लेते हैं, लेकिन बैकअप के लिए सरकारी बिजली ग्रिड से जुड़े रहते हैं, जिसका रखरखाव खर्च कंपनियों को ही सबसे ज्यादा उठाना पड़ता है. 

उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा भारी असर

सीईए (CEA) के नए नियमों के मुताबिक, अब उपभोक्ताओं की जेब पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिलने वाला है. जहां, घरेलू और कृषि उपभोक्ता के बारे में बात करें तो, साल 2030 तक कुल बिजली बिल में फिक्स्ड कॉस्ट की वसूली को बढ़ाकर 25 प्रतिशत तक पूरी तरह से कर दिया जाएगा. इतना ही नहीं, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल फैक्ट्रियों और दुकानों के लिए इसे सीधे 100 प्रतिशत तक करने की नई योजना बनाने की सिफारिश भी की गई है. 

Delhi Parking Scam: नकली पार्किंग टिकट से लोग परेशान, जानें दिल्ली में चल रहे Parking Scam से कैसे बचें

तो वहीं, दूसरी तरफ सोलर यूजर्स का इस्तेमाल करने वालों के लिए एक अलग और महंगा बिलिंग ढांचा तैयार करने पर विचार किया जा रहा है. हांलाकि, यह प्रस्ताव अब 'फोरम ऑफ रेगुलेटर्स' के पास मंजूरी के लिए भेज दिया गया है. जहां, इसके लागू होने के बाद आम जनता के पास बिजली बचाकर बिल कम करने का विकल्प बेहद ही सीमित रह जाएगा.