Medical Store: आज के समय में हेल्थ सेक्टर सबसे स्टेबल और भरोसेमंद बिजनेस माना जाता है. बाजार ऊपर जाए या नीचे, दवाओं की जरूरत कभी कम नहीं होती. यही वजह है कि मेडिकल स्टोर का कारोबार लगातार ग्रोथ में है. खासतौर पर उन लोगों के लिए यह एक अच्छा ऑप्शन है. जो कम जगह और सीमित निवेश के साथ अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं.

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लेकिन यहां एक बात साफ समझनी जरूरी है कि मेडिकल स्टोर सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं. बल्कि बड़ी जिम्मेदारी भी है. दवाओं से जुड़ी लापरवाही सीधे लोगों की सेहत पर असर डाल सकती है. इसलिए इस बिजनेस में उतरने से पहले नियम और लाइसेंस के बारे में ठीक से समझना बेहद जरूरी है. जान लीजिए मेडिकल खोलने के लिए क्या होती है पूरी प्रोसेस.

कैसा स्टोर खोलना है यह पता करें

मेडिकल स्टोर खोलने से पहले यह तय करना जरूरी है कि आप किस तरह का स्टोर शुरू करना चाहते हैं. अस्पताल के अंदर खुलने वाला मेडिकल स्टोर मरीजों की तत्काल जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया जाता है. वहीं रिहायशी इलाकों में खुलने वाला इंडिपेंडेंट मेडिकल स्टोर सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. 

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आजकल मॉल और कमर्शियल एरिया में चेन फार्मेसी और फ्रेंचाइजी आउटलेट भी तेजी से बढ़ रहे हैं. इसके अलावा टाउनशिप मेडिकल स्टोर और सरकारी परिसरों में मौजूद मेडिकल शॉप भी अलग कैटेगरी में आते हैं. स्टोर का मॉडल पता होने के बाद ही इन्वेस्टमेंट, लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सही से हो पाता है.

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कैसे होता है रजिस्ट्रेशन?

मेडिकल स्टोर का रजिस्ट्रेशन भारतीय फार्मेसी अधिनियम 1948 के तहत किया जाता है. इसके लिए राज्य सरकार के संबंधित विभाग में आवेदन देना होता है. इसके साथ ही यह भी तय करना पड़ता है कि बिजनेस किस फॉर्म में चलेगा. छोटे स्तर पर शुरू होने वाले मेडिकल स्टोर आमतौर पर ओनरशिप या पार्टनरशिप में खोले जाते हैं. 

बड़े अस्पताल या चेन फार्मेसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी मॉडल को अपनाते हैं. हाल के समय में एलएलपी भी पॉपुलर हो रहा है. क्योंकि इसमें पार्टनर्स को कानूनी सेफ्टी मिलती है. इसके अलावा दुकान और प्रतिष्ठान पंजीकरण यानी गुमास्ता लाइसेंस भी जरूरी होता है. जो आगे कई लाइसेंस के लिए बेस डॉक्युमेंट बनता है.

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टैक्स और ड्रग लाइसेंस के लिए क्या करें?

मेडिकल स्टोर चलाने के लिए टैक्स से जुड़े नियमों को समझना भी जरूरी है. अगर सालाना कारोबार तय सीमा से ऊपर जाता है तो जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होता है. लेकिन सबसे अहम होता है ड्रग लाइसेंस. बिना इसके मेडिकल स्टोर चलाना मुमकिन नहीं है. 

खुदरा दवा लाइसेंस के लिए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट यानी जिसके पास बी.फार्मा या एम.फार्मा की डिग्री हो उसकी मौजूदगी जरूरी होती है. दुकान का न्यूनतम क्षेत्रफल तय है और रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर जैसी सुविधाएं होना जरूरी है. जिससे दवाओं को सही तापमान पर रखा जा सके. थोक लाइसेंस के लिए नियम थोड़े अलग होते हैं. 

किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत होगी?

ड्रग लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय सही डॉक्यूमेंट्स होना बेहद जरूरी है. इसमें तय फॉर्मेट में आवेदन पत्र, कवर लेटर, फीस का चालान, दुकान का नक्शा और ओनरशिप का सर्टिफिकेट शामिल होता है. इसके साथ ही बिजनेस रजिस्ट्रेशन से जुड़े डाॅक्यूमेंट, एफिडेविट और रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट से जुड़े डॉक्युमेंट भी जमा करने होते हैं. अगर सभी डॉक्यूमेंट सही हों तो लाइसेंस मिलने की प्रोसेस ज्यादा आसान और तेज हो जाती है. 

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