Indian Railway: ट्रेन में सफर के दौरान अक्सर लोग खिड़की वाली सीट पर बैठना ज्यादा पसंद करते हैं. बाहर के नजारे को देखते हुए यात्रा करने का कुछ अलग ही मजा है. ऐसे में हमारे मन में एक सवाल आता है कि जब सामने कई सारे ट्रैक होते हैं तो लोको पायलट को कैसे पता चलता है कि ट्रेन किस ट्रैक पर ले जानी है. अगर आपको भी नहीं पता कि आखिरकार इसके पीछे क्या राज है तो आज हम आपको बताएंगे इसके पीछे के छिपे राज के बारे में.

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होम सिग्नल से मिलती है जानकारी

लोको पायलट को सही ट्रैक की जानकारी होम सिग्नल से मिलती है. जब किसी जगह पर एक ट्रैक आगे जाकर कई हिस्सों में बंटता है तो वहां लगभग 300 मीटर पहले होम सिग्नल लगाया जाता है और यही सिग्नल लोको पायलट को बताता है कि ट्रेन को किस ट्रैक पर आगे बढ़ाना है. साथ ही यह संकेत देता है कि स्टेशन पर ट्रेन को सुरक्षित तरीके से किस लाइन पर लेकर जाना है.

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लोको पायलट ऐसे करता है सही ट्रैक का चुनाव

बता दें कि लोको पायलट ट्रेन चलाते टाइम सामने लगे सिग्नल पर नजर रखता है. सिग्नल के जरिए उसे पहले ही जानकारी मिल जाती है कि किस दिशा में ट्रेन को आगे ले जाना है.इसी कारण ट्रेन सही ट्रैक पर चलती है और सफर सुरक्षित बना रहता है. 

हर ट्रेन में होते हैं दो लोको पायलट

भारतीय रेलवे की ज्यादातर ट्रेनों में दो लोग मौजूद होते हैं. एक लोको पायलट और दूसरा असिस्टेंट लोको पायलट. अगर मुख्य लोको पायलट को थकान हो जाए या फिर किसी वजह के चलते परेशानी हो तो असिस्टेंट लोको पायलट जिम्मेदारी संभाल लेता है. अगर किसी प्रकार की इमरजेंसी आ जाए तब भी वह ट्रेन को सुरक्षित पहुंचाने का काम करता है.

रात के समय ट्रैक की ऐसे होती है पहचान

काफी लोगों के मन में ये भी सवाल आता है कि रात के समय ट्रैक दिखता कैसे है. रात के समय ट्रैक के पॉइंट्स पर छोटे बल्ब लगे होते हैं, जिन्हें देखकर लोको पायलट ट्रैक को पहचानते हैं. 

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