Hydrogen Train Loco Pilot Salary: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का उद्घाटन 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद रेलवे स्टेशन से किया था. इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत है कि यह प्रदूषण नहीं फैलाती और इसका किराया भी 5 रुपये से शुरू होता है और अधिकतम 25 रुपये तक है. हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं जैसे, यह ट्रेन चलती कैसे है, इसके संचालन में कितना खर्च आता है और साथ ही इस ट्रेन को चलाने वाले लोको पायलट को कितनी सैलरी मिलती है? अगर आप भी हाइड्रोजन ट्रेन के लोको पायलट की सैलरी जानना चाहते हैं तो आज इसके बारे में पूरी जानकारी जान लीजिए. 

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हाइड्रोजन ट्रेन का लोको पायलट अलग होता है?

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अगर आपको यह लगता है कि हाइड्रोजन ट्रेन चलाने के लिए कोई अलग से पद बनाया गया है तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. इस ट्रेन को भी सामान्य ट्रेनों के अनुभवी और सीनियर लोको पायलट ही चलाते हैं. हां ये जरूर है कि हाईड्रोजन ट्रेन की नई तकनीक और फ्यूल सिस्टम को समझने के लिए उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है, क्योंकि यह सामान्य ट्रेन से अलग है. 

सैलरी ही नहीं, साथ में मिलते हैं ये फायदे

अगर आप ऐसा सोचते हैं कि लोको पायलट को सिर्फ सैलरी मिलती है तो असल में ऐसा नहीं है. इसके अलावा भी उन्हें कई सुविधाएं दी जाती है जैसे...

  • नाइट ड्यूटी अलाउंस
  • मकान किराया भत्ता(HRA)
  • रनिंग अलाउंस
  • महंगाई भत्ता (DA)

इन सबको जोड़कर उनकी सैलरी में अच्छी-खासी बढ़ोतरी हो जाती है.

कितनी मिलती है सैलरी?

हाइड्रोजन ट्रेन या अन्य आधुनिक ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट को सैलरी कुछ इस प्रकार दी जाती है.

  • इस ट्रेन को चलाने वाले लोको पायलट की सैलरी उनके अनुभव और जिम्मेदारी के हिसाब से अलग हो सकती है.
  • आमतौर पर उनकी सैलरी लगभग 30 हजार से 1 लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है.
  • वहीं सीनियर लोको पायलट की बेसिक सैलरी 35,400 रुपये से शुरू होती है.

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