Birth Certificate: बच्चे के जन्म के बाद सबसे जरुरी दस्तावेजों में बर्थ सर्टिफिकेट शामिल होता है. यह सिर्फ जन्म का प्रमाण नहीं है, बल्कि भविष्य में स्कूल एडमिशन, पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी, सरकारी योजनाऐं और कई कानूनी कामों के ले भी जरुरी होता है. ऐसे में .ह जानना जरुरी है कि अस्पताल से बर्थ सर्टिफिकेट कैसे बनता है, कौन- कौन से दस्तावेज लगते हैं और इसे मिलने में कितना समय लगता है.
बर्थ सर्टिफिकेट बनाने की प्रक्रिया
अस्पताल से मिली जानकारी के आधार पर स्थानीय जन्म पंजीकरण प्राधिकरण बच्चे का जन्म रजिस्टर में दर्ज करता है. कई राज्यों में यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन हो चुकी है.
कुछ जगहों पर माता-पिता को अस्पताल द्वारा दिया गया जन्म रिकॉर्ड या डिस्चार्ज स्लिप लेकर नगर निगम या पंचायत कार्यालय में आवेदन करना पड़ सकता है. वहीं कई अस्पताल सीधे ऑनलाइन पंजीकरण भी करा देते हैं.
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कौन-कौन से दस्तावेज लगते हैं?
बर्थ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए आमतौर पर ये दस्तावेज मांगे जा सकते हैं:
- अस्पताल द्वारा जारी जन्म प्रमाण या डिस्चार्ज स्लिप.
- माता और पिता का आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र.
- माता-पिता का पता प्रमाण (यदि आवश्यक हो).
- विवाह प्रमाण पत्र (कुछ मामलों में).
- आवेदन पत्र.
कितने दिन में मिलता है बर्थ सर्टिफिकेट?
यदि अस्पताल समय पर जन्म की सूचना भेज देता है और सभी रिकॉर्ड सही होते हैं, तो आमतौर पर 7 से 21 दिनों के भीतर जन्म प्रमाण पत्र जारी हो जाता है. कई शहरों में यह इससे भी जल्दी उपलब्ध हो जाता है.
कुछ राज्यों में आवेदन और प्रमाण पत्र डाउनलोड करने की सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है.
क्याजन्मकेतुरंतबादआवेदनकरनाजरूरीहै?
हाँ. भारत में जन्म का पंजीकरण 21 दिनों के भीतर कराना सबसे आसान और सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है. इस अवधि में पंजीकरण कराने पर आमतौर पर कोई अतिरिक्त औपचारिकता नहीं होती.
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