RO Filter: यह तो सभी जानते हैं कि जल है तो जीवन है. लेकिन, हमारे अच्छे स्वास्थय के लिए साफ पानी का होना सबसे ज्यादा मायने रखता है. लेकिन, आज भी भारत के कई इलाकों में अशुद्ध पानी पीने की वजह से लाखों लोगों की मौत हो जाती है. यही वजह है कि ज्यादातर घरों में लोग वॉटर प्यूरीफायर का बढ़-चढ़कर इस्तेमाल करते हैं. इतना ही नहीं, लोग इसकी सर्विसिंग को लेकर लापरवाही भी बरतते हैं और फिल्टर तभी बदलते हैं जब मशीन पूरी तरह से काम करना बंद कर देती है.

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जानें पानी में कितना होना चाहिए टीडीएस

यह तो सभी जानते हैं कि वॉटर प्यूरीफायर का केवल काम पानी में मौजूद हानिकारक टीडीएस को कम करना होता है. जिसको लेकर स्वास्थ्य मानकों का मानना है कि पीने के पानी में टीडीएस 50 से 120 mg/L के बीच ही होना चाहिए. ज्यादा होने पर यह आपकी सेहत पर जानलेवा साबित भी हो सकता है.

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आखिर खराब फिल्टर की कैसे करें पहचान?

ध्यान दें, कि अगर पीते समय पानी कड़वा या फिर खारा लग रहा है तो बिना किसी देर के समझाएं कि आपके वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर अब पूरी तरह से खराब हो चुका है. इतना ही नहीं, अगर प्यूरीफायर का टैंक भरने में पहले से ज्यादा समय ले रहा है, तो यह भी फिल्टर के ब्लॉक होने का एक तरह से साफ-साफ संकेत है. 

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कैसे बदल सकते हैं प्यूरीफायर का फिल्टर

हमेशा ध्यान रखें कि वॉटर प्यूरीफायर के फिल्टर को 6 या फिर एक साल होने के अंदर पूरी तरह से बदल देना चाहिए. इसके अलावा प्यूरीफायर में लगा आरओ मेंब्रेन केवल 3 सालों तक ही काम करता है. तो वहीं, पानी की गुणवत्ता और इस्तेमाल के आधार पर समय से पहले भी आप किसी सही टेक्नीशियन से वॉटर प्यूरीफायर की आसानी से जांच करा सकते हैं.