दिल्ली नगर निगम (MCD) में काम करने वाले हजारों कर्मचारियों के लिए नए साल की शुरुआत एक बड़ी राहत लेकर आई है. अब तक एमसीडी कर्मचारियों को इलाज के लिए पहले अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़ते थे और बाद में बिल पास कराने की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होता था. कई बार अस्पताल कैशलेस इलाज देने से मना कर देते थे, क्योंकि एमसीडी की ओर से भुगतान समय पर नहीं हो पाता था. लेकिन अब यह परेशानी खत्म होने जा रही है. 

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केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की तर्ज पर अब एमसीडी कर्मचारियों को भी प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलने लगी है. इसके लिए एमसीडी ने एक नई स्वास्थ्य योजना शुरू की है, जिसका नाम एमसीडी कर्मचारी स्वास्थ्य योजना (MCD-ESH) है, यह योजना 1 जनवरी से पूरे दिल्ली नगर निगम में लागू हो चुकी है और इससे करीब एक लाख स्थायी कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा. ऐसे में आइए जानते हैं कि दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में MCD कर्मचारी फ्री इलाज कैसे करवा सकते हैं और यह सुविधा कैसे मिलेगी? 

क्या है एमसीडी कर्मचारी स्वास्थ्य योजना (MCD-ESH)?

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एमसीडी कर्मचारी स्वास्थ्य योजना एक कैशलेस मेडिकल स्कीम है. इसके तहत कर्मचारी प्राइवेट अस्पतालों में बिना पैसे दिए इलाज करवा सकते हैं. दवा, जांच, भर्ती और सर्जरी का पूरा खर्च योजना के तहत कवर होगा. इलाज के दौरान किसी तरह की कैपिंग (सीमा तय) नहीं होगी. कर्मचारी और उनके आश्रित (परिवार के सदस्य) भी इस योजना में शामिल होंगे. 

पहले क्या समस्या थी?

अब तक एमसीडी कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा तो मिलती थी, लेकिन कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं थी. पहले कर्मचारी को खुद पैसे देने पड़ते थे, बाद में मेडिकल बिल पास कराने में महीनों लग जाते थे. एमसीडी की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण है. कई अस्पताल कैशलेस इलाज से मना कर देते थे. इसी वजह से एमसीडी के पैनल में शामिल अस्पताल भी कर्मचारियों का कैशलेस इलाज नहीं कर रहे थे. 

दिल्ली के प्राइवेट अस्पतालों में MCD कर्मचारी फ्री इलाज कैसे करवा सकते हैं?

नई योजना के तहत कर्मचारियों से हर महीने निश्चित अंशदान (Contribution) लिया जाएगा. यह पैसा एक अलग मेडिकल खाते में जमा होगा. इसी खाते से सीधे अस्पतालों और जांच लैब को भुगतान किया जाएगा. इससे अस्पतालों को समय पर पैसा मिलेगा और कर्मचारियों को बिना किसी परेशानी के इलाज मिलेगा. 

 इसके लिए कितने रुपये खर्च करने होंगे?

एमसीडी की नई स्वास्थ्य योजना के तहत कर्मचारियों को हर महीने अपने वेतन के हिसाब से अंशदान देना होगा. निचले स्तर के कर्मचारियों के वेतन से 250 रुपये प्रति माह, मध्यम श्रेणी के कर्मचारियों से 500 से 750 रुपये, जबकि अधिकारी स्तर यानी लेवल-12 के कर्मचारियों से 1000 रुपये प्रति माह काटे जाएंगे. यह राशि कर्मचारियों को अलग से जमा नहीं करनी होगी, बल्कि सीधे उनकी सैलरी से अपने-आप कट जाएगी, जिसके बदले उन्हें प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी. 

क्या सिर्फ 250–1000 रुपये में मिलेगा पूरा इलाज?

अगर कर्मचारी इस योजना में शामिल हैं तो इलाज के समय कोई पैसा नहीं देना होगा. चाहे दवा हो, जांच हो या ऑपरेशन हो. पूरा खर्च योजना के तहत कवर किया जाएगा यानी हर महीने थोड़ी सी राशि देकर लाखों रुपये तक का इलाज संभव होगा. योजना के तहत एमसीडी कर्मचारियों को मेडिकल कार्ड जारी किया जाएगा. कार्ड में कर्मचारी और उनके आश्रितों का नाम दर्ज होगा. इसी कार्ड के आधार पर अस्पताल में कैशलेस इलाज मिलेगा. 

कितने कर्मचारी उठाते हैं मेडिकल सुविधा का फायदा?

एमसीडी के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अभी सिर्फ 30 प्रतिशत कर्मचारी ही मेडिकल सुविधा का उपयोग करते हैं. वहीं करीब 70 प्रतिशत कर्मचारी इलाज नहीं कराते हैं. इससे योजना में एक संतुलन (रोटेशन सिस्टम) बनेगा और अस्पतालों को भुगतान में कोई दिक्कत नहीं आएगी. यह योजना  प्राइवेट अस्पतालों में कैशलेस इलाज, इलाज के खर्च की कोई चिंता नहीं,  कम अंशदान, बड़ा फायदा, कर्मचारी और परिवार दोनों को सुरक्षा, पहले से ज्यादा पारदर्शी सिस्टम खास है. 

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