भारतीय राजनीति में इंदिरा गांधी एक बड़ा और प्रभावशाली चेहरा हैं. वह भारत की सबसे लोकप्रिय नेताओं और प्रधानमंत्रियों में से एक थीं. एक प्रधानमंत्री के रूप में उनकी सबसे बड़ी खासियत उनका साहसी नेतृत्व था. वह बड़े फैसले लेने में बिल्कुल भी नहीं हिचकती थीं. इसलिए पूरे देश में लोगों के बीच उनकी आयरन लेडी की छवि बन गई थी. हम सभी को उनके राजनीतिक जीवन के बारे में अच्छी-खासी जानकारी होगी, लेकिन क्या आपको उनके व्यक्तिगत जीवन और उनके जीवनसाथी फिरोज गांधी के बारे में पता है. उनकी यह लव स्टोरी या प्रेम कहानी काफी उतार-चढ़ाव से भरी हुई थी. जो रिश्ता पहले इतना मजबूत और गहरा था, लेकिन ऐसा क्या हुआ कि इंदिरा गांधी और उनके पति फिरोज गांधी के बीच मतभेद इतने बढ़ गए, जो कभी भर नहीं पाए.

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इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की प्रेम कहनी कैसे शरू हुई?

इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी का रिश्ता साल 1930 में इलाहाबाद, आज के प्रयागराज से शुरू होता है. फिरोज गांधी युवा अवस्था से ही स्वतंत्रता सेनानी बन गए थे और देश को आजादी दिलाने वाले आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लेते थे. वह नेहरू परिवार, खासकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू के काफी करीब माने जाते थे. जब कमला नेहरू बीमार पड़ीं, तो फिरोज गांधी नियमित रूप से उनके घर यानी आनंद भवन जाया करते थे और उनकी पूरी निस्वार्थ भाव से सेवा किया करते थे. 

इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की मुलाकात और मेलजोल इसी दौरान हुआ और अपनी मां की सेवा करने वाले फिरोज के प्रति उनके मन में सम्मान की भावना जाग्रत हुई. जब फिरोज गांधी ने इंदिरा गांधी को अपने दिल की बात बताई, यानी उन्हें प्रपोज किया, तो इंदिरा गांधी ने साफ इनकार कर दिया, क्योंकि उस समय इंदिरा गांधी की उम्र काफी कम थी. उस समय इंदिरा गांधी की उम्र सिर्फ 16 साल थी, लेकिन जब इंदिरा और फिरोज लंदन में पढ़ रहे थे, तो दोनों के बीच प्रेम भावना जाग्रत हुई और वे दोनों प्रेमी बन गए. जवाहरलाल नेहरू इस रिश्ते के बिल्कुल खिलाफ थे, क्योंकि फिरोज गांधी पारसी समुदाय से आते थे. हालांकि, महात्मा गांधी के हस्तक्षेप के बाद इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी की शादी 26 मार्च 1942 को हो ही गई.

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शादीशुदा जीवन में आई दरार

इंदिरा और फिरोज गांधी के रिश्ते में दरार तब आई, जब इंदिरा गांधी के पिता जवाहरलाल नेहरू देश के प्रधानमंत्री बने. उन्होंने इंदिरा गांधी को अपने साथ रहने के लिए बुला लिया और इंदिरा अपने पिता जवाहरलाल नेहरू की सचिव के तौर पर काम करने लगीं. इससे फिरोज गांधी को लगा कि इंदिरा उनके बजाय अपने पिता के साथ ज्यादा समर्पित हैं. वहीं जब फिरोज गांधी सांसद बने, तो उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णमाचारी से इस्तीफा दिलवाया. इससे जवाहरलाल नेहरू काफी परेशान हुए और इंदिरा भी अपने पति से काफी रूठ सी गईं. धीरे-धीरे दोनों का मिलना-जुलना कम हो गया और इंदिरा गांधी के पत्रों से भी पता चलता है कि उनका वैवाहिक जीवन सही नहीं था.

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