Patients Consumers Rights: लोगों को लगता है कि सामान की खरीदारी करने वाले या कोई सर्विस लेने वाले लोग ही कंज्यूमर कहलाते हैं. और वही कंज्यूमर अधिकार रखते हैं. लेकिन ऐसा नहीं है यहां और भी कई लोगों के पास होते हैं. जो लोग इलाज करवाते हैं उनके पास भी यह अधिकार होते हैं. कोई भी मरीज सिर्फ इलाज पाने वाला व्यक्ति ही नहीं है. बल्कि वह सेवा लेने वाला ग्राहक यानी कंज्यूमर भी है. 

कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के तहत मरीजों को भी वही अधिकार दिए गए हैं जो किसी भी सामान्य उपभोक्ता को मिलते हैं. इसका मतलब यह है कि अगर अस्पताल या डॉक्टर सेवा देने में लापरवाही करते हैं.गलत बिलिंग करते हैं या जरूरी जानकारी छिपाते हैं. तो मरीज कानूनी कार्रवाई कर सकता है. जान लीजिए इसे लेकर क्या कहता है कानून. 

मरीज को क्यों माना जाता है कंज्यूमर? 

अस्पतालों में इलाज करवाने मरीज को कंज्यूमर माना जाता है. इसे लेकर कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट साफ कहता है कि जो भी व्यक्ति पैसे देकर सेवा लेता है. वह कंज्यूमर की कैटेगरी में आता है. अस्पताल में डॉक्टर द्वारा दी गई मेडिकल सर्विस भी इसी दायरे में गिनी जाती है. इसका सीधा मतलब है कि मरीज भी कंज्यूमर है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के कई फैसलों में यह स्पष्ट किया गया है कि मेडिकल नेग्लिजेंस, गलत दवाइयां देना, उचित इलाज में लापरवाही या बिल में गड़बड़ी होने पर मरीज कंज्यूमर फोरम में केस कर सकता है. 

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इससे मरीज को न सिर्फ आर्थिक नुकसान की भरपाई मिल सकती है. बल्कि अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है. इस प्रावधान का मकसद है कि मरीज के अधिकारों की रक्षा हो सके और सेवा देने वालों की जवाबदेही तय की जा सके.

कंज्यूमर कानून के तहत मरीज के अधिकार 

कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत मरीजों को कई अहम अधिकार दिए गए हैं. इनमें  ट्रांसपेरेंट बिलिंग का अधिकार, इलाज से जुड़ी जानकारी पाने का अधिकार और सुरक्षित सेवा पाने का अधिकार शामिल है. अगर अस्पताल बिना जानकारी दिए ज्यादा बिल वसूलता है या गलत दवा देता है.

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तो मरीज शिकायत कर सकता है. इसके लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कंज्यूमर फोरम बने हुए हैं. यहां मरीज शिकायत दर्ज कर सकता है और न्याय पा सकता है. इसके अलावा अगर किसी मरीज को मानसिक या शारीरिक नुकसान होता है तो मुआवजे का दावा भी किया जा सकता है. 

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