Trasit Free Visa For Germany:जर्मनी ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा फ्री ट्रांजिट सुविधा का ऐलान किया है. यानी अब अगर कोई भारतीय यात्री जर्मनी के किसी एयरपोर्ट से होकर किसी तीसरे देश जा रहा है. तो उसे अलग से ट्रांजिट वीजा लेने की जरूरत नहीं होगी. यह फैसला जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा के बाद जारी संयुक्त बयान में सामने आया. 

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इस फैसले से अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान होगी. समय बचेगा और वीजा से जुड़ी कागजी प्रक्रिया काफी हद तक कम हो जाएगी. खास तौर पर उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो यूरोप के रास्ते अमेरिका, कनाडा या दूसरे देशों की उड़ान लेते हैं. जान लीजिए नार्मल वीजा से कितना अलग होता है ट्रांजिट वीजा.

ट्रांजिट फ्री वीजा का मतलब क्या है? 

ट्रांजिट फ्री वीजा का सीधा सा मतलब है कि यात्री केवल फ्लाइट बदलने के लिए जर्मनी में उतरता है और एयरपोर्ट की इंटरनेशनल ट्रांजिट एरिया से बाहर नहीं जाता. ऐसे में अब भारतीय यात्रियों को पहले की तरह ट्रांजिट वीजा के लिए आवेदन नहीं करना पड़ेगा. पहले जर्मनी से होकर यात्रा करने पर भारतीयों को दस्तावेज जमा करने फीस देने और अप्रूवल का इंतजार करने जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होता था. 

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अब यह झंझट खत्म हो जाएगा. इससे न सिर्फ टिकट बुकिंग ज्यादा आसान होगी. बल्कि आखिरी समय में बनने वाले ट्रैवल प्लान भी बिना वीजा अड़चन के पूरे हो सकेंगे. एयरपोर्ट पर रुकने का एक्सपीरिएंश भी पहले से ज्यादा आसान होगा क्योंकि यात्रियों को इमिग्रेशन  फॉर्मेलिटिज में नहीं पड़ना पड़ेगा.

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नॉर्मल वीजा से यह कितना अलग होता है? 

ट्रांजिट वीजा और नॉर्मल वीजा में सुविधाओं का फर्क है. ट्रांजिट में यात्री देश में एंट्री नहीं करता सिर्फ एयरपोर्ट के भीतर रहकर अगली फ्लाइट पकड़ता है. इसमें न तो घूमने की इजाजत होती है और न ही रात बाहर रुकने की. वहीं नॉर्मल वीजा जैसे टूरिस्ट, बिजनेस या स्टूडेंट वीजा देश में एंट्री की परमिशन देते हैं. 

इनके जरिए आप जर्मनी में ठहर सकते हैं. शहर घूम सकते हैं, मीटिंग कर सकते हैं या पढ़ाई कर सकते हैं. नॉर्मल वीजा में बायोमेट्रिक, इंटरव्यू, होटल बुकिंग, फाइनेंशियल प्रूफ जैसे दस्तावेज जरूरी होते हैं. जबकि ट्रांजिट फ्री सुविधा में यह सब नहीं करना पड़ता.

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