घर खरीदना किसी भी इंसान की जिंदगी का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला माना जाता है. इसमें न सिर्फ बड़ी रकम लगती है, बल्कि लंबी प्लानिंग, सही टाइमिंग और फाइनेंशियल समझ भी जरूरी होती है. आज के समय में होम लोन आसानी से मिल जाने के कारण यह फैसला और भी उलझन भरा हो गया है कि घर पूरी रकम देकर खरीदा जाए या लोन लेकर. वहीं भारत में लगातार बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों के बीच यह सवाल और अहम हो जाता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि फुल पेमेंट करके घर खरीदे या इसके लिए लोन लें और इन दोनों में से बढ़िया ऑप्शन क्या है.
निवेश और लोन की तुलना क्यों जरूरी?
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स बताते हैं कि घर खरीदते समय सिर्फ यह देखना काफी नहीं है कि आपके पास पूरा पैसा मौजूद है या नहीं. असली सवाल यह होता है कि वह पैसा कहां निवेशित है और कितना रिटर्न दे रहा है. अगर आपकी सेविंग ऐसी जगह लगी है, जहां से करीब 15 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिल रहा है और वहीं होम लोन लगभग 9 प्रतिशत ब्याज दर पर मिल रहा है तो ऐसे में फाइनेंस करा कर घर खरीदना ज्यादा समझदारी भरा हो फैसला हो सकता है. लेकिन अगर निवेश पर रिटर्न कम और लोन पर ब्याज ज्यादा है तो फुल पेमेंट बेहतर ऑप्शन बनता है.
सेविंग्स से घर खरीदने के फायदे और नुकसान
फायदे
सेविंग से घर खरीदने पर सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपको किसी तरह का ब्याज नहीं देना पड़ता है. लोन पर लंबी अवधि में इंटरेस्ट की रकम कई बार घर की असली कीमत से भी ज्यादा हो सकती है. वहीं कैश में पेमेंट करने से पूरी प्रक्रिया तेज होती है, किसी बैंक अप्रूवल का इंतजार नहीं करना पड़ता और डील जल्दी पूरी हो जाती है. साथ ही ईएमआई की चिंता से मुक्त होकर मानसिक शांति भी मिलती है. ऐसे खरीदार जरूरत पड़ने पर बिना किसी बैंक की अनुमति के प्रॉपर्टी बेच सकते हैं और रिसेल मार्केट में उन्हें मोल भाव का भी ज्यादा फायदा मिलता है.
नुकसान
पूरी सेविंग एक ही प्रॉपर्टी में लगाने से आर्थिक सुरक्षा कमजोर हो सकती है. किसी इमरजेंसी की कंडीशन में नकदी की कमी परेशानी बढ़ा सकती है. इसके अलावा यह पैसा अगर किसी दूसरे निवेश ऑप्शन में लगाया जाता है तो शायद उससे होम लोन के ब्याज से ज्यादा रिटर्न मिल सकता है. साथ ही कैश में घर खरीदने पर इनकम टैक्स में मिलने वाली छूट का फायदा भी नहीं मिलता है.
होम लोन लेकर घर खरीदने के फायदे और नुकसान
फायदे
बैंक या फाइनेंस कंपनी से होम लोन लेने पर प्रॉपर्टी से जुड़े सभी दस्तावेज की गहन जांच की जाती है. इससे यह सुनिश्चित हो जाता है की प्रॉपर्टी कानूनी रूप से सुरक्षित है और किसी तरह के विवाद या धोखाधड़ी की आशंका नहीं है. यह सुविधा कैश में घर खरीदने पर खुद खरीददार को देखनी पड़ती है. वहीं होम लोन लेने पर इनकम टैक्स के सेक्शन 24 और 80सी के तहत ब्याज और प्रिंसिपल अमाउंट पर टैक्स में छूट मिलती है. इससे कुल टैक्स बोझ कम होता है. वहीं लोन लेने से सेविंग सुरक्षित रहती है जिसे दूसरी जगह निवेश कर बेहतर रिटर्न कमाया जा सकता है. साथ ही समय पर ईएमआई चुकाने से क्रेडिट स्कोर सुधरता है, जिससे फ्यूचर में फाइनेंशियल ऑप्शन बढ़ते हैं.
नुकसान
होम लोन एक लंबी जिम्मेदारी होती है, जो कई सालों तक चलती है. समय के साथ ब्याज की वजह से कुल पेमेंट प्रॉपर्टी की कीमत से कई ज्यादा हो सकता है. अगर किसी कारणवश ईएमआई समय पर नहीं चुकाई गई, तो बैंक प्रॉपर्टी पर कब्जा भी कर सकता है. इसके अलावा लोन अप्रूवल न मिलने पर जोखिम भी बना रहता है. ऐसे में घर कैश में खरीदना या होम लोन लेना यह फैसला हर व्यक्ति की आर्थिक स्थिति, इनकम, सेविंग और भविष्य की योजनाओं पर निर्भर करता है.
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