अगर आप नौकरी करते हैं तो नियमों के तहत आपकी कंपनी ने भी आपका पीएफ खाता खुलवा रखा होगा. जिन लोगों के पीएफ खाते होते हैं, उन कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने एक निश्चित अमाउंट काटकर जमा किया जाता है. वहीं इतना ही पैसा कंपनी भी अपने कर्मचारियों के पीएफ खाते में जमा करती है. पर क्या आप जानते हैं कि आप अपने पीएफ का पैसा नौकरी के बीच में भी निकाल सकते हैं. दरअसल, कई ऐसे जरूरी काम होते हैं, जिनके लिए आप नौकरी के बीच में पीएफ का पैसा निकाल सकते हैं. ऐ
ऐसे में अगर आप अपना घर बनाने या खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपके प्रोविडेंट फंड की बचत इसमें बड़ी मदद कर सकती है. ईपीएफओ के मौजूदा नियमों के तहत नौकरी के दौरान भी घर से जुड़ी जरूरत के लिए पीएफ की आंशिक निकासी की सुविधा दी गई है. हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें और लिमिट तय की गई है, जिन्हें जानना जरूरी है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि घर बनाने के लिए पीएफ का पैसा कैसे निकाल सकते हैं और इसमें कितनी रकम विड्रॉल हो सकती है. घर के लिए पीएफ निकालने का क्या है नियम? ईपीएफओ में हाउसिंग से जुड़ा पीएफ विड्रॉल पैराग्राफ 68बी, 68बीबी और 68 बीडी के तहत किया जाता है. ईपीएफओ 3.0 के बाद प्रक्रिया पहले से ज्यादा आसान और ऑनलाइन हो गई है, लेकिन घर के लिए पीएफ निकालने की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी यह सुविधा आसान जरूर हुई है, लेकिन पूरी रकम निकालने की अनुमति नहीं है. वहीं घर बनाने या खरीदने के लिए पीएफ निकालने के लिए कर्मचारियों का ईपीएफ मेंबर होना जरूरी है. यूएएन एक्टिव होना चाहिए और आधार, पैन व बैंक से जुड़ी केवाईसी पूरी होनी चाहिए. इसके साथ ही जिस प्रॉपर्टी के लिए पीएफ निकाला जा रहा है, वह कर्मचारी के नाम, जीवनसाथी के नाम या दोनों के जॉइंट नाम पर होनी चाहिए. बिना ओनरशिप प्रूफ के हाउसिंग पीएफ नहीं मिलता है. कितनी रकम निकाल सकते हैं? घर खरीदने या बनाने के लिए आमतौर पर कम से कम 3 से 5 साल की सर्विस जरूरी मानी जाती है. वहीं अगर पीएफ का इस्तेमाल होम लोन चुकाने के लिए करना होता है तो करीब 10 साल की नौकरी का नियम लागू होता है. घर के रिनोवेशन के लिए मकान बने हुए कम से कम 5 साल पूरे होने चाहिए. वहीं घर खरीदने या बनाने के लिए कर्मचारी अपने कुल पीएफ बैलेंस का अधिकतम 90 प्रतिशत तक निकल सकता है. इसके अलावा एक सीमा यह भी है कि 36 महीने की बेसिक सैलरी और डीए तक ही PF निकाला जा सकता है. इन दोनों में से जो रकम कम होगी, वही कर्मचारी को मिलेगी. होम लोन और रिनोवेशन का अलग नियम वहीं होम लोन की ईएमआई या लोन चुकाने के लिए भी पीएफ बैलेंस का 90 प्रतिशत तक निकाला जा सकता है. घर की मरम्मत या रिनोवेशन के लिए 12 महीने की बेसिक सैलरी और डीए तक की लिमिट तय है. इन दोनों मामलों में यह सुविधा जीवन में सीमित बार ही मिलती है. इसके अलावा जरूरी सर्विस पीरियड पूरा होने के बाद कर्मचारी कभी भी हाउसिंग पीएफ के लिए आवेदन कर सकता है. ईपीएफओ 3.0 के बाद ऑनलाइन क्लेम आमतौर पर तीन वर्किंग डेज में सेटल हो जाता है. हालांकि इसके लिए शर्त यह रहती है, कि केवाईसी और डाक्यूमेंट्स पूरे हो.
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