दिल्ली मेट्रो में सफर के दौरान कई बार ऐसा होता है कि ट्रेन के एक कोच में पैर रखने तक की जगह नहीं होती, जबकि उसी ट्रेन के दूसरे डिब्बों में तुलनात्मक रूप से कम भीड़ रहती है. ऐसे में यात्रियों को ट्रेन आने के बाद ही अंदाजा लगाना पड़ता है कि किस कोच में जगह मिल सकती है.

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अब दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने यात्रियों की इस परेशानी को कम करने के लिए एक नई सुविधा शुरू की है. इसके जरिए यात्री ट्रेन में चढ़ने से पहले ही अलग-अलग कोच में मौजूद भीड़ का अनुमान लगा सकेंगे.

कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

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इस तकनीक के लिए मेट्रो के प्रत्येक कोच में लोड सेंसर लगाए गए हैं. ये सेंसर चलते समय कोच के कुल वजन का आकलन करते हैं और उसकी तुलना खाली कोच के वजन से करते हैं. दोनों के बीच अंतर के आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि संबंधित डिब्बे में कितने यात्री मौजूद हैं.

इसके बाद यात्रियों की अनुमानित संख्या के आधार पर कोच की ऑक्यूपेंसी प्रतिशत में तैयार की जाती है. यह जानकारी प्लेटफॉर्म पर लगे पैसेंजर इंफॉर्मेशन डिस्प्ले सिस्टम (PIDS) की स्क्रीन पर ट्रेन आने से कुछ समय पहले दिखाई देती है. स्क्रीन पर कोच C1 से C6 तक अलग-अलग दर्शाए जाएंगे.

पिंक लाइन पर शुरू हुई रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी सुविधा

DMRC ने अपनी पिंक लाइन (लाइन-7) पर रियल-टाइम कोच ऑक्यूपेंसी डिस्प्ले सिस्टम लागू कर दिया है. इसके तहत मेट्रो स्टेशनों के प्लेटफॉर्म पर लगी यात्री सूचना स्क्रीन पर ट्रेन के सभी छह कोचों में मौजूद भीड़ की जानकारी दिखाई देगी. पिंक लाइन मजलिस पार्क से शिव विहार/मौजपुर-बाबरपुर तक यात्रियों को कनेक्ट करती है.

इससे पहले यह सुविधा मैजेंटा लाइन (लाइन-8) पर उपलब्ध थी. वहां साल 2022 से यात्रियों को कोच के अनुसार भीड़ की जानकारी दी जा रही है. इस व्यवस्था को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद अब इसका विस्तार पिंक लाइन पर भी किया गया है.

पिंक लाइन पर सुविधा लागू करना क्यों था चुनौतीपूर्ण?

DMRC के प्रिंसिपल एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (कॉरपोरेट कम्युनिकेशन) अनुज दयाल के मुताबिक, पिंक लाइन एक सर्कुलर कॉरिडोर है. इस वजह से अलग-अलग हिस्सों के बीच सिस्टम का डेटा जोड़ना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण था. हालांकि, अब इस व्यवस्था को सफलतापूर्वक शुरू कर दिया गया है. DMRC का यह कदम मेट्रो यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाने और यात्रियों को बेहतर जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.

यात्रियों को कैसे मिलेगा इसका फायदा?

इस सुविधा का सबसे बड़ा लाभ सुबह और शाम के व्यस्त समय में देखने को मिल सकता है. यात्री स्क्रीन देखकर पहले ही तय कर सकेंगे कि उन्हें किस कोच के सामने खड़ा होना चाहिए. इससे ज्यादा भीड़ वाले डिब्बों में चढ़ने की मजबूरी कम होगी.

इसके अलावा ट्रेन आने के बाद खाली जगह तलाशने के लिए पूरे प्लेटफॉर्म पर भागदौड़ भी नहीं करनी पड़ेगी. यात्रियों का अलग-अलग कोच में बेहतर बंटवारा होने से किसी एक डिब्बे पर अधिक दबाव कम करने में मदद मिलेगी.

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