DA Hike 2% Reason: सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी हैं. पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि यह बढ़ोतरी 2  से 4 फीसदी के बीच हो सकती है, लेकिन फैसला सबसे लो लेवल पर लिया गया है. जिससे कई कर्मचारियों की उम्मीद को झटका भी लगा हैं. 

आम तौर पर इसे सरकार का फैसला माना जाता हैं, लेकिन असल में DA की बढ़ोतरी एक तय फॉर्मूले के आधार पर होती है. आइए जानते हैं, आखिर इस फैसले के पीछे की वजह क्या है?

ऐसे तय होता है DA

अक्सर लोगों को लगता है कि DA बढ़ाना सरकार की मर्जी पर निर्भर करता है, लेकिन असल में ऐसा नहीं है. इंडिया टूडे से बातचीत में बैंकबाजार के सीईओ Adhil Shetty ने बताया कि डीए एक फॉर्मूले के तहत तय होता है. जो महंगाई से जुड़ा होता है.

उन्होंने आगे बताया कि, 12 महीने के औसत CPI-IW (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स) को आधार बनाया जाता है. इस बार के आंकड़े करीब 2–3 प्रतिशत बढ़ोतरी का संकेत दे रहे थे. लेकिन 7वें वेतन आयोग के तहत इसे 2 प्रतिशत तय किया गया है. 

डीए में कमी की वजह

Adhil Shetty के मुताबिक, DA महंगाई पर निर्भर करती है. इसमें सरकार की सीधी भूमिका नहीं होती हैं. पिछले कुछ समय में महंगाई ज्यादा नहीं बढ़ी, इसलिए DA में भी ज्यादा बढ़ोतरी न करने का फैसला लिया गया. 

मुख्य वजह

1. पिछले एक साल में महंगाई काफी हद तक कंट्रोल में रही है. महंगाई आंकड़ों की बात करें तो, यह रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 2 से 6 प्रतिशत के अनुमान के दायरे के अंदर ही बनी रही है.

2. आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में महंगाई करीब 3.34 फीसदी थी, जो अप्रैल में घटकर लगभग 3.16 प्रतिशत पर पहुंच गई थी. साल 2025 में कीमतों पर ज्यादा दबाव देखने को नहीं मिला. खासकर उस अवधि में खाने-पीने की चीजें सस्ती रहने से राहत मिली.

3.साल 2026 की शुरुआत में महंगाई में थोड़ी तेजी देखने को मिली थी. आंकड़े जनवरी में 2.75%, फरवरी में 3.21% और मार्च में 3.40% रहे थे. हालांकि, यह फिर ज्यादा ऊंचे लेवल पर नहीं पहुंची. इन वजहों से सरकार ने डीए में ज्यादा बढ़ोतरी न करने का फैसला लिया हैं. 

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