जब भी हम बाजार से कोई इलेक्ट्रॉनिक आइटम या कोई बड़ा सामान खरीदते हैं तो सबसे पहले मन में ख्याल उसकी गारंटी या वारंटी को लेकर आता है. हम दुकानदार से इसके बारे में जानकारी भी लेते हैं. गारंटी या वारंटी के बारे में जानकारी लेने का मुख्य उद्देश्य यह है कि अगर सामान में कुछ खराबी आ जाए तो हमें ज्यादा परेशान न होना पड़े. हालांकि, गारंटी के बावजूद भी कुछ कंज्यूमर काफी परेशान होते हैं क्योंकि दुकानदार क्लेम से मना कर देते हैं.  

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आज हम आपको आपके इसी अधिकार के बारे में बताने जा रहे हैं कि किस प्रकार आप ऐसे हालात में दुकानदार की शिकायत कर सकते हैं. दरअसल, कई बार सामान के गारंटी में होने के बावजूद कंपनी या दुकानदार क्लेम देने से मना कर देते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है तो चिंता न करें, आप अपने अधिकार का यहां इस्तेमाल कर सकते हैं. 

शिकायत करने की प्रक्रिया

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सबसे पहले दुकानदार को अपना गारंटी या वारंटी कार्ड दिखाएं. अगर दोनों ठीक होने पर भी दुकानदार नहीं मान रहा है तो आप भारत के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय या जिला कंज्यूमर फोरम में शिकायत कर सकते हैं. ये संस्थाएं आपके अधिकारों की रक्षा के लिए होते हैं.

दुकानदार ने मना किया? अब ये करें

आपको किसी वकील के पास जाकर अपना नाम, दुकानदार का नाम और पता एक पत्र पर लिखना है. उसके बाद आपको अपनी शिकायत के बारे में लिखना है. इसके साथ ही उस एप्लिकेशन में अपना वारंटी या गारंटी कार्ड भी जमा करें. यह प्रोसेस बिल्कुल निशुल्क है. 

कीमत के आधार इस फोरम में करें शिकायत

  • अगर आपके सामान की कीमत 5 लाख है तो इसकी शिकायत जिले के कंज्यूमर फोरम में होगी. 
  • अगर 5 लाख से 20 लाख की है, तो मामले की शिकायत स्टेट कमीशन के कंज्यूमर फोरम में की जाएगी.
  • अगर सामान की कीमत 20 लाख से ज्यादा है, तो इसकी शिकायत नेशनल कमीशन के कंज्यूमर फोरम में की जाएगी. 
  • कंज्यूमर फोरम एक्ट के अनुसार शिकायत ई-फाइलिंग अर्थात ऑनलाइन अप्लाई की जाता है. कंज्यूमर के पास प्रोडक्ट और सर्विस के बारे में सभी जानकारी लेने का हक होता है.

वारंटी और गारंटी क्यों जरूरी?

आज के समय में ज्यादातर सामानों पर वारंटी या गारंटी होती है. हालांकि, यह ज्यादातर तकनीकी सामानों पर होती है. यह उपभोक्ता को उसके सामान पर सुरक्षा देता है.  तकनीकी सामान काफी महंगे होते हैं और लोग उन्हें बार-बार खरीद नहीं सकते हैं. इन्हीं कारणों से कंपनियां इन सामानों पर वारंटी या गारंटी देती है. यह गांरटी और वारंटी एक समय सीमा तक ही होती है. वारंटी में जो चीज खराब है उसे ठीक किया जाता है और गारंटी में सामान के खराब होने पर उसे पूरी तरीके से बदल दिया जाता है या पैसे वापिस कर दिए जाए है.

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