Ayushman Card Empanelled Hospitals: आज के वक्त में स्वास्थ्य सुविधाएं पहले से ज्यादा डिजिटल और आसान हो गई हैं. लेकिन गंभीर बीमारी या अचानक इलाज की जरूरत पड़ने पर सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इलाज का खर्च कैसे संभाला जाए. इसी परेशानी को कम करने के लिए सरकार की आयुष्मान भारत योजना एक मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम कर रही है. अगर आप इस योजना के पात्र हैं और आपके पास आयुष्मान कार्ड है. 

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तो बड़े अस्पताल खर्च की टेंशन काफी कम हो सकती है. इस स्कीम का मकसद गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बेहतर मेडिकल सुविधा देना है. मतलब यह कि आप जरूरत पड़ने पर बिना ज्यादा सोच-विचार के इलाज के ऑप्शन तलाश सकते हैं. लेकिन सभी अस्पतालों में इससे फ्री इलाज नहीं मिलता. जान लीजिए आपके घर के पास में किस अस्पताल में काम करेगा आयुष्मान कार्डय

आपके नजदीकी अस्पताल में आयुष्मान कार्ड चलेगा या नहीं?

सरकार की ओर से जारी किया जाने वाला आयुष्मान कार्ड सभी अस्पतालों में मान्य नहीं होता है. कई बार मरीज जल्दबाजी में इलाज शुरू कर देते हैं. लेकिन बाद में पता चलता है कि अस्पताल आयुष्मान योजना के नेटवर्क में शामिल नहीं है. इसलिए इलाज शुरू करने से पहले यह चेक कर लेना जरूरी है कि चुना गया हॉस्पिटल योजना से जुड़ा है या नहीं. हर अस्पताल इस स्कीम के तहत कैशलेस इलाज नहीं देता. 

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अपने शहर में रजिस्टर्ड अस्पताल की जानकारी हासिल करना अब काफी आसान हो गया है. इसके लिए आप नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की आधिकारिक वेबसाइट pmjay.gov.in पर जा सकते हैं. वहां फाइंड हॉस्पिटल सेक्शन में जाकर से पूरी लिस्ट मिल जाती है. इसके अलावा आप चाहें तो कॉमन सर्विस सेंटर या मोबाइल एप के जरिए भी जानकारी हासिल कर सकते हैं.

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कैसे मिलता है फ्री इलाज का फायदा?

इस योजना के तहत पात्र परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक का हेल्थ कवर मिलता है. यह कवर हर साल रिन्यू होने वाली सुविधा के रूप में काम करता है. यानी गंभीर बीमारी, सर्जरी या लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की स्थिति में इलाज का खर्च सरकार उठाती है. इस कवर में ऑपरेशन, दवाइयां, टेस्ट और हॉस्पिटल स्टे जैसे कई मेडिकल खर्च शामिल हो सकते हैं. 

सबसे बड़ी खास बात यह है कि यह सुविधा कैशलेस मोड में मिलती है. मरीज को इलाज से पहले पैसे देने की जरूरत नहीं होती. हालांकि यह जरूरी है कि इलाज के लिए चुना गया अस्पताल आयुष्मान नेटवर्क में रजिस्टर्ड हो. आपको बस अस्पताल में भर्ती होना होता है. और अपना आयुष्मान कार्ड दिखाना होता है. इसके बाद फ्री इलाज शुरू हो जाता है.

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