नाकाम सिस्टम की मार, हर आदमी लाचार । Ghanti Bajao
ABP News Bureau | 19 Jul 2022 12:21 AM (IST)

आजादी के दशको बाद भी हमारे अन्नदाता यानी हमारे किसान भगवान भरोसे ही खेती करते हैं. अभी देश में कहीं बाढ़ है, कहीं सूखा है तो कहीं यूरिया का संकट. इन सबके बीच फंसा है देश का अन्नदाता किसान. किसान पूरी मेहनत कर अन्न उपजाता है लेकिन बदले में दुख ही पाता है. आजादी के 75 साल बाद भी ना तो बाढ़ का कहर कम हो पाया है ना सूखे से निजात मिल पाई है. आज भी पूरा सिस्टम इंद्रदेव की कृपा पर निर्भर है. जब इंद्रदेव रूठ जाते हैं तो किसान रोता है और उसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है. बाढ़ और सूखे से महंगाई बढ़ती है. ऐसे में जरूरी है महंगाई बढ़ाने वाले और किसानों को बेचारा बनाने वाले सिस्टम की घंटी बजाना.