लखनऊ में एक ऐसी परंपरा आज भी जिंदा है, जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं. यहां नागपंचमी के दूसरे दिन महिलाओं का एक अनोखा दंगल सजता है, जहां न तो पुरुष पहलवान नजर आते हैं और न ही दर्शक दीर्घा में पुरुषों को जगह मिलती है. अखाड़े में सिर्फ महिलाएं उतरती हैं, एक-दूसरे को ललकारती हैं और फिर दांव-पेंच दिखाते हुए मुकाबला करती हैं. इस खास आयोजन को स्थानीय भाषा में ‘हापा’ कहा जाता है, जो अब इलाके की पहचान बन चुका है.

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देवी पूजन से होती है शुरुआत, फिर सजता है अखाड़ा

लखनऊ के अहमामऊ गांव में हर साल नागपंचमी के दूसरे दिन इस अनोखी परंपरा का आयोजन किया जाता है. सुबह से ही महिलाएं एकत्र होती हैं, देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करती हैं और पारंपरिक गीत गाती हैं. धार्मिक रस्मों के बाद माहौल बदल जाता है और गांव का अखाड़ा महिलाओं के जोश और उत्साह से भर उठता है.

महिलाएं देती हैं चुनौती, फिर शुरू होता है मुकाबला

हापा की शुरुआत किसी औपचारिक घोषणा से नहीं, बल्कि महिलाओं की आपसी चुनौती से होती है. एक महिला दूसरी को मुकाबले के लिए ललकारती है और फिर दोनों अखाड़े में उतरकर अपनी ताकत और फुर्ती का प्रदर्शन करती हैं. आसपास बैठी महिलाएं तालियों और उत्साहवर्धन के साथ पहलवानों का हौसला बढ़ाती हैं.

पुरुषों के लिए नो एंट्री

इस आयोजन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है. सिर्फ छोटे बच्चों को महिलाओं के साथ आने की अनुमति होती है. गांव की परंपरा के अनुसार न केवल आयोजन स्थल पर, बल्कि आसपास भी पुरुषों की मौजूदगी पसंद नहीं की जाती. यहां तक कि अगर कोई पुरुष घर की छत से आयोजन देखने की कोशिश करे, तो उसे भी वहां से हटने के लिए कहा जाता है.

नवाबों के दौर से जुड़ी है कहानी

अहमामऊ का यह आयोजन कोई नई परंपरा नहीं है. स्थानीय लोगों के मुताबिक इसकी जड़ें नवाबों के दौर तक जाती हैं। उस समय नवाबी परिवार की महिलाएं यहां आकर समय बिताती थीं. नाच-गाना, मेल-मिलाप और पारंपरिक कार्यक्रम इस आयोजन का हिस्सा हुआ करते थे. समय के साथ यह परंपरा बदलती गई और पिछले कुछ वर्षों में महिलाओं की कुश्ती ने इसकी पहचान को एक नया रूप दे दिया.

परंपरा, ताकत और आत्मविश्वास का संगम

हापा सिर्फ कुश्ती का आयोजन नहीं है, बल्कि महिलाओं की भागीदारी, आत्मविश्वास और सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक माना जाता है. गांव की महिलाएं आज भी पूरे उत्साह के साथ इस परंपरा को निभाती हैं और नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का काम कर रही हैं.

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विजेताओं का होता है सम्मान

मुकाबलों के अंत में जीत हासिल करने वाली महिलाओं को परंपरा के अनुसार सम्मानित किया जाता है. हालांकि यहां जीत से ज्यादा अहम हिस्सा लेना और परंपरा को आगे बढ़ाना माना जाता है. एक ऐसे दौर में जब महिलाओं के खेल और उनकी उपलब्धियों की चर्चा देशभर में हो रही है, लखनऊ का यह अनोखा ‘हापा’ दिखाता है कि ग्रामीण भारत में भी महिलाओं की ताकत, आत्मविश्वास और परंपरा का संगम किस तरह आज भी जीवंत है.

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