एलपीजी की कमी को लेकर लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं. आम आदमी के लिए खाना बनाना एक बुनियादी जरूरत है, लेकिन जब गैस ही उपलब्ध न हो, तो रोजमर्रा की जिंदगी काफी मुश्किल हो जाती है. खासकर मजदूर वर्ग, जो पहले से ही सीमित संसाधनों में जीवन गुजारता है, इस तरह की समस्याओं से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है.

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इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने लोगों के गुस्से को और भड़का दिया है. इस वीडियो में एक सुपरवाइजर मजदूरों को गैस की कमी के दौरान दही-चूड़ा खाने की सलाह देता नजर आ रहा है. यह बात कई लोगों को असंवेदनशील और मजाकिया लगी, क्योंकि समस्या गंभीर है और उसका समाधान इतना आसान नहीं है,

क्या है पूरा मामला?

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खाड़ी देशों में चल रहे युद्ध का असर अब भारत तक पहुंचने लगा है. इसका सीधा असर गैस सप्लाई पर पड़ा है, जिससे घरेलू एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी हो गई है. गैस की इस कमी के कारण आम लोगों को खाना बनाने में कठिनाई हो रही है. कई जगहों पर लोग घंटों लाइन में खड़े होकर सिलेंडर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन फिर भी उन्हें गैस नहीं मिल पा रही है. 

वायरल वीडियो में क्या दिखा?

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कई मजदूर एक लाइन में खड़े हैं और उनके सामने उनका सुपरवाइजर खड़ा है. वह मजदूरों से पूछता है कि क्या सभी को गैस की समस्या हो रही है, जिस पर सभी मजदूर हां में जवाब देते हैं. इसके बाद सुपरवाइजर कहता है कि अगर इमरजेंसी में गैस नहीं मिले, तो लोग दही-चूड़ा खा लें. वह यह भी जोड़ता है कि नवरात्रि चल रही है, इसलिए फल खाने की कोशिश करें. हालांकि, वह यह भी कहता है कि यह कोई स्थायी समाधान नहीं है और एक-दो दिनों में गैस की व्यवस्था कर दी जाएगी. 

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लोगों का गुस्सा क्यों भड़का?

यह वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी. कई यूजर्स का कहना है कि मजदूरों की समस्या का मजाक उड़ाया जा रहा है. लोगों का मानना है कि जब किसी के पास पहले से ही सीमित साधन हैं, तब उसे इस तरह की सलाह देना ठीक नहीं है. कुछ यूजर्स ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बयान बताया, जबकि कुछ ने कहा कि यह जमीनी हकीकत से दूर सोच को दर्शाता है. वीडियो को शेयर किए जाने के बाद इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ लोगों ने सुपरवाइजर की बात को हल्के में लिया, लेकिन ज्यादातर लोग नाराज दिखे. कई यूजर्स ने कमेंट किया कि समस्या का असली समाधान ढूंढने की जरूरत है, न कि इस तरह के अस्थायी और अव्यावहारिक सुझाव देने की. 

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