Why Smartwatches Use Green Light: जब आप स्मार्टवॉच को अपनी कलाई से हटाते हैं तो एक-दो सेकंड तक इसकी बैक साइड में ग्रीन लाइट फ्लैश होती है. चाहे ऐप्पल की महंगी स्मार्टवॉच हो या कोई किफायती मॉडल, सब स्मार्टवॉच में ग्रीन लाइट को यूज किया जाता है. जब कंपनियां एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में फीचर्स से लेकर डिजाइन तक सब अलग बना सकती है तो वो अलग-अलग कलर की लाइट को क्यों नहीं यूज करतीं? दरअसल, ग्रीन लाइट यूज करने के पीछे साइंस छिपी हुई है और आज हम उसी साइंस को जानेंगे.
स्मार्टवॉच ऐसे मापती है पल्स
इसका सीधा जवाब है कि ग्रीन लाइट के कारण पल्स को डिटेक्ट कर पाना आसान होता है, लेकिन इसके पीछे की साइंस काफी कॉम्प्लेक्स है. पल्स को मापने के लिए स्मार्टवॉच फोटोप्लेथिसमोग्राफी प्रोसेस को यूज करती है. इस टेक्निक से यह पता चल जाा है कि टिश्यू और स्किन में ब्लड वॉल्यूम में कितना बदलाव आया है. जब स्किन और शरीर के दूसरे ऑर्गन के पास ब्लड ट्रांसफर होता है तो हार्ट बीट के साथ कैपिलरीज एक्सपैंड और कॉन्ट्राक्ट होती है. इसी दौरान स्मार्टवॉच स्किन पर लाइट फेंककर यह रिकॉर्ड करती है कि कितनी लाइट वापस आई है. फिर उस नंबर को रीडेबल फॉर्मेट में स्क्रीन पर दिखाया जाता है.
...पर इसमें ग्रीन लाइट का क्या काम?
खून में हीमोग्लोबिन होता है, जो ऑक्सीजन के कॉन्टैक्ट में आते ही लाल हो जाता है. यह ज्यादातर लाइट को अब्जॉर्ब कर लेता है और स्पेसिफिक वेवलेंग्थ वाली लाइट को ही रिफ्लेक्ट करता है. कोई भी लाल ऑब्जेक्ट ग्रीन लाइट को पूरी तरह अब्जॉर्ब करता है. इसलिए जब कैपिलरी खून से भरी होती है तो वो ग्रीन लाइट को पूरी तरह सोख लेती है. इससे स्मार्टवॉच के लिए यह पता लगाना आसान हो जाता है कि कैपिलरी कब खून से भरी हुई है और कब वह खाली है. इसके अलावा ग्रीन लाइट स्किन में उतना अंदर नहीं जा पाती है, जितने बाकी कलर की लाइट जाती है. इस कारण स्मार्टवॉच बॉडी के सरफेस से ही रीडिंग उठाकर सटीक मेजरमेंट बताती है.
बाकी लाइट का भी होता है यूज
ऐसा नहीं है कि स्मार्टवॉच में केवल ग्रीन लाइट का ही यूज होता है. ग्रीन के साथ-साथ कंपनियां दूसरी मेजरमेंट के लिए अलग तरह की लाइट भी यूज करती हैं. ब्लड ऑक्सीजन मापने के लिए कई स्मार्टवॉच लाल कलर की लाइट को भी यूज करती है. यह मेजरमेंट पूरी तरह अलग प्रोसेस से होता है, इसलिए इसमें ग्रीन लाइट की जरूरत नहीं होती.
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