चाइनीज कंपनी रियलमी अगले हफ्ते भारत में अपना Realme P4 Power 5G फोन लॉन्च करेगी. इस फोन में 10,001mAh की बैटरी दी जाएगी. यह इस साल का अब तक का सबसे बड़े बैटरी पैक वाला फोन होगा. पिछले महीने HONOR Power 2 फोन लॉन्च हुआ था, जिसमें 10,080mAh की बैटरी थी. शाओमी और दूसरी कंपनियां भी बड़े बैटरी पैक वाले फोन लाने की तैयारी में हैं, लेकिन सैमसंग और ऐप्पल जैसी बड़ी कंपनियां अभी तक इस रेस में पीछे क्यों हैं? आइए इसका कारण जानते हैं.

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बड़ी कंपनियां क्यों नहीं ला रही बड़े बैटरी पैक?

जब कम कीमत वाले फोन में बड़े बैटरी पैक मिल सकते हैं तो ऐप्पल, गूगल और सैमसंग जैसी कंपनियां अपने फ्लैगशिप डिवाइसेस में इससे क्यों परहेज करती हैं? इसका जवाब टेक्नोलॉजी में छिपा हुआ है. दरअसल, अभी तक अधिकतर कंपनियां स्टैंडर्ड लिथियम-आयन बैटरियां यूज करती आई हैं. इसकी कैपेसिटी की एक लिमिटेशन होती है. अब रियलमी और ऑनर ने जो फोन लॉन्च किए हैं, उनमें सिलिकॉन-कार्बन बैटरी यूज की गई है. इस बैटरी की खास बात है कि यह कम स्पेस में ज्यादा एनर्जी स्टोर कर सकती है, जिससे फोन को आकार बढ़ाए बिना भी ज्यादा कैपेसिटी दी जा सकती है.

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ऐप्पल, सैमसंग यह बैटरी क्यों नहीं यूज कर रहीं?

दरअसल, सिलिकॉन-कार्बन बैटरी टेक्नोलॉजी अभी तक नई है और इसका अभी तक बहुत यूज नहीं हुआ है. ऐसे में बड़ी कंपनियां इस पर रिस्क नहीं लेना चाहतीं. ये कंपनियां सालों तक किसी टेक्नोलॉजी की रिलायबिलिटी को देखती है और फिर अपने डिवाइस में शामिल करती हैं. इसके अलावा इन कंपनियों की बैटरी बनाने के लिए बड़ी संख्या में मैटेरियल की जरूरत होती है. इसलिए ये मैटेरियल का सोर्स और उसकी भरोसेमंद सप्लाई भी सुनिश्चित करती हैं. यही कारण है कि अभी तक हमें गूगल, सैमसंग या ऐप्पल के महंगी कीमत वाले फोन में बाकी कंपनियों जितने बड़े बैटरी पैक देखने को नहीं मिल रहे.

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