गुजरात के सूरत में लोगों के घरों तक पानी पहुंचने से पहले ही करोड़ों की लागत से बनी पानी की टंकी गिर गई. क्वालिटी टेस्टिंग के लिए पानी की टंकी भरते समय भ्रष्टाचार का शक हुआ. रियल एस्टेट चेकिंग के दौरान हाथों से पपड़ी निकलती दिखी. क्या ठेकेदार पर कार्रवाई होगी या पानी का नाम बदलकर जमीन कर दिया जाएगा. जनता के टैक्स का करोड़ों पैसा पानी में चला गया.

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आज अरेठ तालुका के ताड़केश्वर गांव में जनता के टैक्स का करोड़ों पैसा पानी में चला गया. ताड़केश्वर गांव में पिछले तीन साल से गाय पगला ग्रुप वॉटर सप्लाई स्कीम के जरिए पानी की टंकी और वॉटर सप्लाई सिस्टम बनाने का काम चल रहा था.

नवनिर्मित पानी की टंकी गिरकर ध्वस्त, बड़ा हादसा टला

जानकारी के अनुसार, पानी की टंकी लगभग बनकर तैयार हो गई थी, दो दिन की टेस्टिंग के लिए 11 लाख लीटर कैपेसिटी वाली टंकी में करीब 9 लाख लीटर पानी भरा गया था. यह पानी की टंकी आज सुबह करीब 12 बजे गिर गई, अच्छी बात ये रही कि इस घटना में किसी महिला को चोट नहीं आई और बड़ी जान का नुकसान टल गया.

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टैंक गिरने से चारों तरफ सिर्फ पानी की टंकी का मलबा ही दिखाई दे रहा था. सरकार ने 15 मीटर ऊंची टंकी और एक तालाब बनाने के लिए 21 करोड़ रुपये दिए थे. लेकिन, पानी का तालाब थोड़ा दूर होने की वजह से तालाब को लगातार नुकसान हो रहा था.

लोगों ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

हालांकि मौके पर ऑपरेशन का रियलिटी टेस्ट भी किया गया, लेकिन 11 लाख लीटर पानी ले जाते समय टंकी की दीवार से पपड़ी निकल गई थी. घटना के बाद गांव वाले भी मौके पर पहुंचे और ऑपरेशन में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगा रहे थे क्योंकि इस पानी की टंकी और तालाब से करीब 14 गांवों को पीने का साफ पानी मिलना था. लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है क्योंकि नई टंकी कब बनेगी और उनके घरों तक पानी कब पहुंचेगा.

डिपार्टमेंट करेगा मामले की जांच

घटना के बाद वॉटर सप्लाई डिपार्टमेंट के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और यह पता लगाने की कोशिश की कि यह घटना कैसे हुई. अधिकारी के मुताबिक, इस टैंक को बनाने का काम कोई सुपर एजेंसी कर रही थी. अधिकारी ने कहा कि SVNIT का एक इंजीनियर जांच करके वॉटर सप्लाई डिपार्टमेंट को रिपोर्ट देगा. उसके बाद टैंक गिरने की असली वजह पता चलेगी. हालांकि, इस टैंक को बनाने में कोई गड़बड़ी या भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, यह जांच का विषय है.

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