Why AI is Getting Expensive: पिछले कुछ समय से हर जगह एआई का बोलबाला है. हर कंपनी अपने कर्मचारियों की छुट्टी कर एआई से उनका काम ले रही है. एआई को अल्टीमेट प्रोडक्टिविटी टूल माना जा रहा है. यही कारण है कि कंपनियां ऑपरेटिंग कॉस्ट को कम करने और एफिशिएंसी को बढ़ाने के लिए एआई पर पूरा जोर दे रही हैं, लेकिन क्या असल में एआई के कारण कंपनियों की लागत कम हो रही है? यह सवाल इसलिए पूछा जा रहा है क्योंकि एआई पर खर्चा लगातार बढ़ रहा है और पैसे बचाने का दावा पूरी तरह सच साबित होता नहीं दिख रहा.
एआई का यूज पड़ रहा है महंगा
एआई ऐसी टेक्नोलॉजी नहीं है, जिस पर एक बार निवेश करने से काम हो जाए. कंपनियों को हर महीने सब्सक्रिप्शन, एंटरप्राइज लाइसेंस, यूसेज-बेस्ड प्राइसिंग और कर्मचारियों को इसकी ट्रेनिंग देने पर भारी पैसा खर्च करना पड़ रहा है. कुछ समय पहले ही खबर आई थी कि एक कंपनी ने एंथ्रोपिक क्लॉड पर लगभग 4200 करोड़ रुपये खर्च कर दिए थे. इसी तरह अमेजन भी बिल बचाने के लिए अपने कर्मचारियों को एआई का संभलकर इस्तेमाल करने की सलाह दे चुकी है. उबर के COO कह चुके हैं कि एआई का यूज काफी महंगा है और इसे जस्टिफाई नहीं किया जा सकता. उबर ने इस पूरे साल का एआई बजट सिर्फ चार महीनों में ही खर्च कर दिया था.
क्यों बढ़ रहा खर्चा?
ट्रेडिशनल सॉफ्टवेयर की बात करें तो इन्हें एनुअल लाइसेंस के जरिए खरीदा जा सकता है, लेकिन एआई के मामले में ऐसा नहीं है. कई जनरेटिव एआई सर्विसेस सब्सक्रिप्शन मॉडल या टोकन कंजप्शन के हिसाब से ऑपरेट होती हैं. अब कंपनियों में राइटिंग से लेकर डेटा एनालिसिस तक एआई का इस्तेमाल हो रहा है. ऐसे में एआई की लागत बेहिसाब बढ़ रही है. यही कारण है कि अब कंपनियां लागत बचाने के तरीके ढूंढ रही हैं. कई कंपनियां अब प्रीमियम एआई मॉडल्स की जगह छोटे और सस्ते मॉडल यूज करने लगी हैं.
एआई की लिमिटेशन भी आ रही सामने
इस बात में कोई शंका नहीं है कि एआई एक पावरफुल टूल है, लेकिन यूज बढ़ने के साथ-साथ इसकी लिमिटेशन भी सामने आ रही है. एआई से वो सारे काम नहीं किए जा सकते, जिनमें इंसानों की जरूरत पड़ती है. ताजा मामला फोर्ड मोटर कंपनी का है. फोर्ड ने एआई इंटीग्रेशन के बाद पिछले तीन सालों में 350 इंजीनियरों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था, लेकिन एआई उन जैसा काम नहीं कर पा रही है. एआई में न तो उन जैसी स्किल है और न ही उन जैसा एक्सपीरियंस. इसी वजह से यह कंपनी अब फिर से उन इंजीनियरों को नौकरी पर रख रही है.
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