Why 3.5 mm Jack Removed: कुछ साल पहले तक फोन में 3.5mm हेडफोन जैक मिलना आम बात थी, लेकिन धीरे-धीरे यह गायब होता गया. कई स्मार्टफोन चार्जिंग पोर्ट को हेडफोन के लिए यूज किया जा रहा है. इस बदलाव की शुरुआत ऐप्पल ने की थी. ऐप्पल ने iPhone 7 में लाइटनिंग पोर्ट में ही चार्जिंग और वायर्ड हेडफोन लगाने का ऑप्शन दिया था. इसके बाद दूसरी कंपनियों ने भी ऐसा करना शुरू कर दिया, लेकिन ऐसा क्यों किया जाने लगा? आज हम इसका जवाब जानेंगे.

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स्पेस बचाने में मिली मदद

आजकल कंपनियां अपने फोन का साइज बढ़ाए बिना इसमें ज्यादा से ज्यादा फीचर्स देना चाहती हैं. इसलिए स्पेस की वैल्यू बढ़ जाती है. 3.5mm हेडफोन जैक को हटाकर कंपनियों के लिए फोन में काफी स्पेस बच गया. इस स्पेस को बड़ी बैटरी और थर्मल कूलिंग सिस्टम समेत किसी भी दूसरी चीज के लिए यूज किया जा सकता है. 

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ड्यूरैबिलिटी बढ़ाने में मदद

हेडफोन जैक हटने से फोन को पानी और धूल से बेहतर तरीके से प्रोटेक्ट किया जा सकता है. इस जैक के हटने का फायदा यह हुआ कि फोन के अंदर धूल और पानी जाने की एक जगह कम हो गई और फोन को अंदर से बेहतर तरीके से सील किया जा सकता है. इससे फोन की IP रेटिंग में सुधार होता है और फोन लंबा चलाने में मदद मिलती है.

USB-C पोर्ट का बढ़ता यूज

कई जगहों पर फोन समेत दूसरे गैजेट में USB-C पोर्ट देना जरूरी हो गया है. यूरोप ने इसे अनिवार्य कर दिया है, जिससे ऐप्पल को भी लाइटनिंग पोर्ट वाले आईफोन बंद करने पड़े थे. अब USB-C पोर्ट को यूनिवर्सल पोर्ट के तौर पर यूज किया जा रहा है. ऐसे में कंपनियां भी इसी पोर्ट के जरिए ऑडियो, चार्जिंग और डेटा ट्रांसफर की फैसिलिटी देना चाहती है. 

डिजाइन के लिए भी जरूरी

आजकल कंपनियों का जोर फोन को पतला बनाने पर है और अब एज-टू-एज स्क्रीन मिलती है. ऐसे में इंटरनल स्पेस बहुत लिमिटेड बच जाता है. उसमें हेडफोन जैक देना कंपनियों के लिए संभव नहीं है.

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