AI Bots On Internet: अब वह दिन दूर नहीं, जब इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा एआई बॉट्स का ट्रैफिक होगा. इंसानों और एआई बॉट्स के बीच का यह बैलेंस अब जल्द ही बिगड़ने वाला है. क्लाउडफ्लेयर के चीफ एग्जीक्यूटिव मैथ्यू प्रिंस का कहना है कि अगले कुछ सालों में इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा एआई से चलने वाले बॉट्स होंगे. उन्होंने बताया कि तेजी से बढ़ रही जनरेटिव एआई के कारण एआई एजेंट्स ह्यूमन एक्टिविटी को पीछे छोड़ देंगे और इंसानों वाले अधिकतर काम करने लगेंगे.

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इंसानों से अलग है बॉट्स का ऑनलाइन बिहेवियर

प्रिंस ने बताया कि इंटरनेट पर बॉट्स का बिहेवियर इंसानों से बहुत अलग होता है. इंसान एक समय में कुछ ही वेबसाइट पर विजिट करते हैं, लेकिन एआई सिस्टम कुछ ही सेकंड में हजारों वेबसाइट को स्कैन कर सकते हैं. उन्होंने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि मान लें अगर एक व्यक्ति डिजिटल कैमरा खरीदना चाहता है तो वह 5 वेबसाइट पर जाएगा, लेकिन एजेंट इसी काम के लिए 5,000 वेबसाइट्स पर जा सकता है. यह रियल ट्रैफिक होगा और हर किसी को इसके लिए तैयार रहना पड़ेगा.

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एआई से पहले क्या हाल था?

प्रिंस का कहना है कि जनरेटिव एआई आने से पहले इंटरनेट पर बॉट का ट्रैफिक केवल 20 प्रतिशत था और इसमें से अधिकतर सर्च इंजन क्रॉलर जैसे भरोसेमंद सोर्स से आ रहा था. इसके अलावा बाकी ज्यादातर बॉट्स स्कैम और मलेशियस एक्टिविटी से लिंक्ड होते थे. अब जनरेटिव एआई के बाद 2027 तक ऐसी स्थिति आ सकती है, जब इंटरनेट पर इंसानों से ज्यादा एक्टिविटी एआई बॉट्स की होगी.

नेटवर्क पर बढ़ेगा दबाव

बॉट एक्टिविटी में इजाफा होने के कारण फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत पड़ेगी. साथ ही डेटा सेंटर और सर्वर आदि की भी डिमांड बढ़ेगी. प्रिंस ने इसकी तुलना कोरोना महामारी से करते हुए कहा कि तब भी यूट्यूब और नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीमिंग में बढ़ोतरी हुई थी और नेटवर्क पर दबाव बढ़ा था. अब फिर ऐसा हो सकता है.

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