आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आज के समय में लोगों के हाथों तक पहुंच चुका है. ऐआई चैटबॉट्स की मदद से यूजर्स अब अपने ज्यादातर काम को आसान बना चुके हैं. इतना ही नहीं, अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी एआई का असर देखने को मिल रहा है. बता दें कि मेटा ने कुछ समय पहले अपने प्लेटफॉर्म पर एआई कंटेंट को हटाने को लेकर कई फैसले लिए थे. लेकिन अब किसी भी एआई पोस्ट को हटाने के लिए सिर्फ एआई की जरूरत नहीं बल्कि इंसान की भी जरूरत होती है हालांकि, हालिया घटनाओं ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर AI किसी पोस्ट को कब खुद हटा सकता है और कब मामला इंसानी मॉडरेटर तक पहुंचता है.
क्या Meta सिर्फ Keywords देखकर पोस्ट हटाता है?
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल ही में सरकार ने मेटा को ये कहा था कि किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एआई पोस्ट को यूहीं हटाना सही नहीं होता है. अगर कंटेंट में जरूरी चीजें मौजूद हैं तो उसे सही फैसले के आधार पर हटाना चाहिए. इसके अलावा सरकार ने Meta की AI बेस्ड मॉडरेशन सिस्टम में ह्यूमर रिव्ये के रोल पर भी सवाल उठाएं हैं. दरअसल, सरकार का मानना है कि किसी भी पोस्ट को एआई उसमें मौजूद कुछ एक टर्म या शब्द को देखकर हटा देता है जबकी ऐसा करना सही नहीं है. अगर पोस्ट को हटाने में ह्यूमन रिव्यू मौजूद रहता है तो ऐसे एरर को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
कैसे होती है एआई कंटेंट की पहचान
जानकारी के अनुसार, Meta का पक्ष इससे पूरी तरह से अलग है. कंपनी के अनुसार, उसका कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम केवल किसी एक शब्द की मौजूदगी के आधार पर फैसला नहीं करता है.
AI पोस्ट के अलग-अलग पार्ट्स जैसे टेक्स्ट, फोटो और दूसरी जीचों को चेक करके ये पता लगाता है कि क्या कंटेंट सच में नियमों का उल्लंघन कर रहा है या नहीं. अगर कुछ गलत पाया जाता है तभी पोस्ट को प्लेटफॉर्म से हटाया जाता है न कि सिर्फ किसी एक शब्द के मौजूद होने से पोस्ट हटता है.
लेकिन अब इंसान की जरूरत तब पड़ती है जब किसी शब्द या कंटेंट को उसके संदर्भ के अनुसार चेक करना होता है. हालांकि, इसमें भी एक समस्या आती है जब किसी प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच को हटाना पड़ता है. एआई किसी भी शब्द के अलग-अलग संदर्भ को समझ नहीं पाता है, इसीलिए हेट स्पीच वाले मामलों में ह्यूमन रिव्यू की जरूरत पड़ती है.
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