Rose Farming: गुलाब की खेती कम पैसों में ज्यादा मुनाफा देने वाली खेती है, पर उसके लिए जरूरी है कि गुलाब की खेती सही से की जाए. गुलाब की खेती करने के लिए सही मौसम का पता होना जरूरी है. साथ ही, यह जानकारी भी होनी चाहिए कि कौन-सी मिट्टी में गुलाब के फूल अच्छी तरह बढ़ते हैं? जानते हैं कि कैसे आप गुलाब की अच्छी खेती कर सकते हैं?
कौन-सा मौसम रहेगा ठीक?
गुलाब की खेती के लिए अक्टूबर से दिसंबर का समय सबसे ठीक माना जाता है. इस समय बहुत अधिक गर्मी नहीं होती. साथ ही, मौसम ठंडा बना रहता है. इस मध्यम तापमान में गुलाब की नई जड़ों का विकास बहुत तेजी से होता है. वहीं, पौधा भी मिट्टी में अपनी पकड़ मजबूत कर लेता है. गुलाब के लिए दिन का तापमान 25 सेल्सियस से 30 सेल्सियस और रात का तापमान 12 सेल्सियस से 15 सेल्सियस सही होता है.
अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भारत के अधिकांश हिस्सों में यही तापमान रहता है. इस मौसम में पौधों की नई शाखाएं अच्छे से निकलती हैं. सर्दियों की हल्की ठंडक और गुनगुनी धूप गुलाब के फूलों के लिए टॉनिक का काम करती है. इस मौसम में आने वाले फूलों का आकार बड़ा होता है. उनकी पंखुड़ियां घनी होती हैं और फूलों का रंग अच्छा गहरा और आकर्षक निकलकर आता है.
कैसी मिट्टी रहेगी सही?
गुलाब की खेती करने के लिए उपजाऊ, हल्की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है. इस मिट्टी में रेत, गाद और चिकनी मिट्टी का सही मिश्रण होता है. इसमें हवा का प्रवाह अच्छा रहता है, जिससे गुलाब की जड़ों को ऑक्सीजन मिलती है. इससे जड़ें बहुत आसानी से और गहराई तक पहुंच पाती हैं. मिट्टी में गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है, जो पौधे को लगातार जरूरी पोषक तत्व देती है. साथ ही, मिट्टी का पीएच मान 6.0 से 7.5 होना चाहिए. इस पीएच रेंज में गुलाब का पौधा मिट्टी में मौजूद सभी जरूरी पोषक तत्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश को सबसे अच्छी तरह सोख पाता है. अगर पीएच बहुत ज्यादा या कम होगा तो खाद डालने पर भी पौधा उसमें पनप नहीं पाएगा. वहीं, इस मिट्टी में गुलाब की जड़ खराब होने का खतरा भी बहुत कम होता है.
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इन बातों का रखें विशेष ध्यान
गुलाब को धूप की भी जरूरत होती है. ऐसे में इसे ऐसी जगह लगाएं, जहां सुबह से दोपहर तक की सीधी और तेज धूप मिले. गुलाब को पानी तब दें, जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी दिखे. गमले या खेत में पानी कभी रुकना नहीं चाहिए. पानी हमेशा पौधे की जड़ में दें. पत्तियों पर पानी छिड़कने से फंगस होने का खतरा बढ़ जाता है. सही समय पर पौधों की छंटाई करें. कटी हुई टहनियों को फंगस से बचाने के लिए बाविस्टिन पाउडर का इस्तेमाल करें.
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