WhatsApp Age Verification: मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सऐप ने भारत में अपने एज वेरिफिकेशन फीचर की टेस्टिंग शुरू कर दी है. कुछ यूजर्स को यह फीचर नजर आ रहा है, जिसमें उसने डेट ऑफ बर्थ पूछी जा रहा है. इसके नीचे लिखा गया है कि भारत में लागू होने वाले कानून के लिए हमें आपकी उम्र पूछनी पड़ रही है. अभी तक एज वेरिफिकेशन टेस्ट ऑप्शन है और यूजर के लिए अपनी एज वेरिफाई करना अनिवार्य नहीं हुआ है. बता दें कि भारत में अगले साल 13 मई से नया डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDC) एक्ट लागू होने जा रहा है, जिसे देखते हुए व्हाट्सऐप एज वेरिफिकेशन का यह फीचर लेकर आ रही है.
एज वेरिफिकेशन को लेकर कंपनी ने क्या कहा?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा की तरफ से कहा गया है कि व्हाट्सऐप DPDP एक्ट के पालन के लिए एज कंफर्म करने के प्राइवेसी-प्रोटेक्टिव तरीके टेस्ट कर रही है. इससे व्हाट्सऐप के काम करने के तरीके और यूजर एक्सपीरियंस में कोई बदलाव नहीं आएगा. कंपनी जानती है कि उम्र की जानकारी प्राइवेट होती है और इस जानकारी को दूसरे यूजर्स के साथ शेयर नहीं किया जाएगा.
किन कानून के लिए तैयारी कर रही है व्हाट्सऐप?
DPDP Act, 2023 डेटा प्राइवेसी से जुड़ा एक कानून है, जो यह देखेगा कि कैसे कंपनियां, सरकारी और दूसरी संस्थाएं यूजर के पर्सनल डेटा को कैसे कलेक्ट, प्रोसेस, स्टोर और यूज करती हैं. इस कानून को अगस्त, 2023 में ही राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और इसके प्रावधानों को चरणबद्ध तरीकों से लागू किया जा रहा है. इस कानून का बच्चों के डेटा से जुड़े प्रावधान अगले साल मई में लागू होने जा रहे हैं. इसके सेक्शन 9 के तहत ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बच्चों के पर्सनल डेटा को लेकर खास नियम बनाए गए हैं. इस कानून में 18 साल से कम उम्र के हर व्यक्ति को 'बच्चा' माना गया है. ऐसे में किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या अन्य डेटा फिड्यूशियरी को बच्चे का पर्सनल डेटा प्रोसेस करने से पहले उसके माता-पिता या लीगल गार्डियन की सत्यापित सहमति (Verifiable Parental Consent) लेनी होगी. इसका मतलब है कि व्हाट्सऐप को यह वेरिफाई करना होगा कि यूजर की उम्र 18 साल से कम है या ज्यादा. अगर उम्र 18 से कम होती है तो उसे बच्चे के पैरेंट्स की सहमति लेनी होगी. इसके बिना वह यूजर का पर्सनल डेटा कलेक्ट और प्रोसेस नहीं कर पाएगी.
आइडेंटिटी को भी कंफर्म करेंगे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स
जैसा हम ऊपर बात कर चुके हैं कि व्हाट्सऐप को डेटा प्रोसेस और क्लेक्ट करने के लिए सिर्फ पैरेंट्स की सहमति की ही जरूरत नहीं पड़ेगी बल्कि इसे वेरिफाई भी करना होगा. यानी प्लेटफॉर्म पर यह बाध्यता आ गई है कि उन्हें बच्चों के पैरेंट्स या गार्डियन की पहचान को कंफर्म करना पड़ेगा. कानून के तहत कंपनियों को यह देखना पड़ेगा कि बच्चे का पैरेंट या लीगल गार्डियन होने की बात कहने वाले व्यक्ति की उम्र 18 साल से ऊपर है या नहीं. इसके लिए उनकी पहचान कंफर्म की जाएगी और इस वेरिफिकेशन का रिकॉर्ड भी रखना होगा.
किन तरीकों से होगी पैरेंट्स की वेरिफिकेशन?
DPDP एक्ट में पैरेंट्स और लीगल गार्डियन की उम्र और पहचान वेरिफाई करने के दो तरीके बताए गए हैं. इसमें पहले तरीके में प्लेटफॉर्म के मौजूदा रिकॉर्ड्स के आधार पर यह पता लगाया जा सकता है. यानी अगर कोई पैरेंट या गार्डियन खुद उस प्लेटफॉर्म का रजिस्टर्ड यूजर और उसकी उम्र और पहचान को वेरिफाई किया गया है तो इसे वेरिफिकेशन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. दूसरे तरीके में पैरेंट्स या गार्डियन सरकारी डॉक्यूमेंट के तहत अपनी पहचान को वेरिफाई कर सकते हैं.
बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बरती जा रही है सख्ती
दुनियाभर के देशों में बच्चों के सोशल मीडिया यूज को लेकर सख्ती बरती जा रही है. ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स बैन हो चुके हैं और कई अन्य देशों में इसकी तैयारी चल रही है.
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