What is Virtual RAM: आजकल कई स्मार्टफोन्स में Virtual RAM का फीचर देखने को मिलता है. कंपनियां दावा करती हैं कि इससे फोन की स्पीड और मल्टीटास्किंग बेहतर हो जाती है. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वाकई इतना असरदार है या सिर्फ एक मार्केटिंग ट्रिक? इसे समझने के लिए पहले यह जानना जरूरी है कि Virtual RAM आखिर काम कैसे करती है.

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कैसे काम करती है Virtual RAM

Virtual RAM असल में आपके फोन की इंटरनल स्टोरेज का एक हिस्सा होता है जिसे अस्थायी तौर पर RAM की तरह इस्तेमाल किया जाता है. जब फोन की असली RAM भर जाती है तो सिस्टम कुछ डेटा को स्टोरेज में शिफ्ट कर देता है ताकि ऐप्स चलते रहें. हालांकि, यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि असली RAM की स्पीड स्टोरेज से काफी ज्यादा होती है. इसलिए Virtual RAM मदद तो करती है लेकिन यह फिजिकल RAM का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकती.

Virtual RAM के फायदे

इस फीचर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह मल्टीटास्किंग को थोड़ा आसान बना देता है. अगर आप एक साथ कई ऐप्स खोलते हैं तो फोन उन्हें जल्दी बंद नहीं करता. इसके अलावा, कम RAM वाले स्मार्टफोन्स में यह फीचर थोड़ी अतिरिक्त राहत देता है. इससे फोन अचानक स्लो होने या ऐप्स के बार-बार रीस्टार्ट होने की समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है.

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Virtual RAM के नुकसान

जहां फायदे हैं वहीं कुछ सीमाएं भी हैं. क्योंकि Virtual RAM स्टोरेज पर निर्भर करती है इसकी स्पीड असली RAM जितनी तेज नहीं होती. इसका मतलब यह है कि हैवी गेमिंग या हाई-परफॉर्मेंस टास्क में आपको ज्यादा फर्क महसूस नहीं होगा. एक और बात यह है कि बार-बार स्टोरेज का इस्तेमाल होने से उसकी लाइफ पर भी असर पड़ सकता है. लंबे समय में यह आपके डिवाइस की स्टोरेज पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है.

क्या आपको इसे ऑन करना चाहिए?

अगर आपका फोन कम RAM वाला है और आप हल्के-फुल्के काम या सामान्य इस्तेमाल करते हैं तो Virtual RAM आपके लिए उपयोगी हो सकती है. लेकिन अगर आप गेमिंग या हैवी ऐप्स का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो यह फीचर ज्यादा मदद नहीं करेगा. असल में, यह फीचर एक सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करता है न कि पूरी तरह समाधान के रूप में.

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