आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज होती दुनिया के बीच कई बड़ी AI कंपनियां और संस्थाएं फ्रंटियर AI के विकास को थोड़ा कंट्रोल करने की बात कर रही हैं. उनका कहना है कि AI लगातार नई क्षमताएं हासिल कर रहा है, लेकिन इसके संभावित खतरों को समझने और उनसे निपटने की तैयारी उतनी तेजी से नहीं हो रही. खासकर ऐसे AI सिस्टम चिंता बढ़ा रहे हैं, जो बिना ज्यादा मानवीय मदद के खुद कई काम कर सकते हैं और साइबर हमलों जैसे खतरनाक इस्तेमाल का जरिया बन सकते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि दुनिया में AI की रफ्तार धीमी करने के बीच भारत पर क्या असर होगा. 

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AI की धीमी रफ्तार के बीच भारत पर क्या असर होगा?

दुनिया में AI को लेकर विकास की रफ्तार कम करने की चर्चा के बीच भारत का नजरिया कुछ अलग है. इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के मुताबिक, भारत अभी AI के उस स्तर पर नहीं पहुंचा है, जहां दुनिया के सबसे एडवांस और बड़े मॉडल तैयार किए जा रहे हैं, फिलहाल देश का जोर ऐसे AI मॉडल और एप्लीकेशन विकसित करने पर है, जो भारत की जरूरतों और यहां के लोगों के लिए ज्यादा यूजफुल हों, हालांकि सरकार AI से जुड़े सुरक्षा खतरों को लेकर भी सतर्क है. AI से जुड़े साइबर सुरक्षा मामलों की जानकारी देने के लिए पहले से नियम लागू हैं. अब इन मामलों की रिपोर्ट कब और किस तरह की जानी चाहिए, इससे जुड़े नियमों को और बेहतर बनाया जा रहा है. 

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क्या भारत की AI तैयारी बड़े मॉडल से आगे बढ़ रही है?

IndiaAI Mission के तहत 20 स्वदेशी AI मॉडल प्रस्तावों को समर्थन के लिए चुना गया है. इनमें 12 बड़े भाषा मॉडल और 8 छोटे भाषा मॉडल शामिल हैं. Sarvam के 30 अरब और 105 अरब पैरामीटर वाले मॉडल, Gnani.ai का speech-to-speech मॉडल, BharatGen के मल्टी लैंग्वेज फाउंडेशन  मॉडल और Avataar AI का वीडियो जनरेशन मॉडल इनमें शामिल हैं. सरकार का ध्यान सिर्फ मॉडल पर नहीं है. डेटासेट, AI प्रतिभा, एप्लीकेशन और सस्ती कंप्यूटिंग क्षमता पर भी काम किया जा रहा है. जुलाई तक 237 प्रोजेक्ट मंजूर किए गए थे, 93 लाख GPU घंटे आवंटित किए गए और 15 कंप्यूट सर्विस प्रोवाइडर को भी सूची में शामिल किया गया था. 

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अमेरिका-चीन की होड़ से अलग है भारत की चुनौती

AI की वैश्विक दौड़ में अमेरिका और चीन पहले से ही फ्रंटियर स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं. अमेरिका की ओर से व्यापक AI रोक का विरोध किया गया है. वहां यह चिंता भी जुड़ी है कि विकास धीमा होने से चीन को बढ़त मिल सकती है. भारत के लिए स्थिति अलग है. देश अभी अपनी कंप्यूट क्षमता, स्वदेशी मॉडल, AI प्रतिभा और एप्लीकेशन का आधार मजबूत कर रहा है. ऐसे में AI विकास को रोकने की जगह सुरक्षा उपायों के साथ आगे बढ़ना भारत के लिए जरूरी माना जा रहा है.

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