भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की एंट्री को लेकर चर्चा तेज है. एलन मस्क की कंपनी Starlink भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करना चाहती है, लेकिन जरूरी मंजूरियों का इंतजार अब तक खत्म नहीं हुआ है. इस देरी को लेकर मस्क ने भारत के कुछ बड़े कारोबारियों पर निशाना साधा है. वहीं केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं.

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इसी बीच लोकलसर्किल्स के सर्वे में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि भारतीय ग्राहक सैटेलाइट इंटरनेट से क्या उम्मीद कर रहे हैं और इसे अपनाने से पहले किन बातों पर ध्यान देना चाहते हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कि स्टारलिंक पर भारतीय कस्टमर्स की राय क्या है. 

स्टारलिंक पर भारतीय कस्टमर्स की राय क्या है?

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लोकलसर्किल्स के सर्वे के मुताबिक, 10 में से 8 इंटरनेट यूजर्स ने माना कि सैटेलाइट इंटरनेट ग्रामीण क्षेत्रों और आपातकालीन स्थितियों में काफी काम आ सकता है. इसकी मदद से उन इलाकों में भी इंटरनेट पहुंचाने की उम्मीद है, जहां मोबाइल नेटवर्क या ब्रॉडबैंड की सुविधा उपलब्ध कराना आसान नहीं है. 

इस तकनीक की खासियत यह है कि इसमें इंटरनेट पहुंचाने के लिए सिर्फ मोबाइल टावरों या जमीन के नीचे बिछी केबल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है. सैटेलाइट के जरिए दूर-दराज के इलाकों तक भी कनेक्टिविटी पहुंचाई जा सकती है. इससे उन लोगों को फायदा मिल सकता है, जिन्हें अब तक अच्छी इंटरनेट सुविधा के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. 

शहरों में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर क्या है लोगों की राय? सर्वे में शहरी इलाकों में ऑप्शनल इंटरनेट कनेक्शन के तौर पर सैटेलाइट इंटरनेट के इस्तेमाल को लेकर लोगों की दिलचस्पी कम दिखाई दी. करीब 10 में से 4 यूजर्स ने इस इस्तेमाल का स्पोर्ट किया. ऐसे में यूजर्स की प्रेफरेंस हर जगह एक जैसी नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की उपलब्धता बढ़ाना बड़ी जरूरत हो सकती है, जबकि शहरों में पहले से मौजूद ब्रॉडबैंड और मोबाइल इंटरनेट के मुकाबले स्टारलिंक की मांग इसकी जरूरत और कीमत पर निर्भर करेगी. 

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स्टारलिंक की लॉन्चिंग के लिए मंजूरी जरूरी

लोकलसर्किल्स के सर्वे में ज्यादातर यूजर्स चाहते हैं कि सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियां भारत के डेटा और सुरक्षा नियमों का पालन करें. वहीं स्टारलिंक ने भारत में 20 गेटवे साइट तैयार की हैं और यूजर्स का डेटा देश में ही रखने की व्यवस्था की है, हालांकि सेवा शुरू करने के लिए कंपनी को जरूरी सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन का इंतजार है. 

स्टारलिंक के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या? भारत में स्टारलिंक, जियो सैटेलाइट कम्युनिकेशन और यूटेलसैट वनवेब को लाइसेंस मिल चुके हैं, लेकिन सेवाएं शुरू करने के लिए तीनों को सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करनी होंगी. सरकार ने किसी भी कंपनी को खास छूट देने से इनकार किया है. स्टारलिंक के लिए किफायती प्लान, डेटा सुरक्षा और जरूरी मंजूरियां जरूरी होंगी. सर्वे के मुताबिक, भारतीय यूजर्स सैटेलाइट इंटरनेट अपनाने के लिए कम कीमत और डेटा सुरक्षा को भी जरूरी मानते हैं. 

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