Smartphone Water Purity Test: दुनिया भर में लाखों लोग ऐसे पानी के स्रोतों पर निर्भर करते हैं जिनकी शुद्धता पर आप आंख बंद करके भरोसा नहीं कर सकते हैं. ऐसे में पानी की जांच करना बेहद जरूरी हो जाता है लेकिन पुराने तरीके अक्सर समय लेने वाले और थोड़े मुश्किल होते हैं. अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा आसान तरीका निकाल लिया है जिससे स्मार्टफोन की मदद से एक मिनट के अंदर पानी की गुणवत्ता की जांच हो सकती है.

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कैसे काम करेगी ये नई तकनीक?

इस नई तकनीक में एक खास तरह की टेस्ट स्ट्रिप का इस्तेमाल किया जाता है. जब इस स्ट्रिप पर पानी की एक बूंद डाली जाती है तो यह उसमें मौजूद गंदगी के संकेतों पर प्रतिक्रिया देती है. खासतौर पर यह यूरोबिलिन नाम के एक पदार्थ को पहचानती है जो आमतौर पर Human या animal waste से जुड़ा होता है. अगर यह तत्व पानी में मौजूद हो तो यह साफ संकेत है कि पानी दूषित हो चुका है.

स्मार्टफोन से कैसे होती है पहचान?

इस सिस्टम में स्मार्टफोन के साथ एक छोटा सा अटैचमेंट जोड़ा जाता है जिसमें LED लाइट होती है. जैसे ही टेस्ट स्ट्रिप पर रिएक्शन होता है उसमें हल्की चमक पैदा होती है. फोन का कैमरा इस चमक को कैप्चर करता है और तुरंत उसका विश्लेषण करके बता देता है कि पानी सुरक्षित है या नहीं. इस पूरे प्रोसेस को ड्रॉप एंड डिटेक्ट कहा जाता है क्योंकि इसमें सिर्फ एक बूंद पानी की जरूरत होती है.

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पुराने तरीकों से कितना अलग?

अब तक पानी की जांच के लिए लैब, केमिकल्स और एक्सपर्ट्स की जरूरत होती थी और रिपोर्ट आने में कई घंटे या कभी-कभी पूरा दिन लग जाता था. लेकिन इस नई तकनीक से वही काम कुछ ही सेकंड में हो सकता है. यह न सिर्फ तेज है बल्कि इस्तेमाल में भी बेहद आसान है. इस तकनीक का परीक्षण वास्तविक परिस्थितियों में भी किया गया है जैसे नदी के पानी और वेस्टवॉटर प्लांट के सैंपल्स पर. नतीजे बताते हैं कि यह तरीका मुश्किल परिस्थितियों में भी सही और भरोसेमंद रिजल्ट देता है.

किन जगहों पर होगा सबसे ज्यादा फायदा?

यह तकनीक खासतौर पर उन इलाकों के लिए बेहद फायदेमंद है जहां लैब सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं जैसे ग्रामीण क्षेत्र, आपदा प्रभावित इलाके या विकासशील देश. इससे लोग खुद ही जल्दी से पानी की जांच कर सकेंगे और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल सुनिश्चित कर पाएंगे.

भविष्य में क्या बदलाव हो सकते हैं?

यह खोज दिखाती है कि कैसे स्मार्टफोन और नई तकनीक मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं. आने वाले समय में इसी तरह के सिस्टम अन्य प्रदूषकों की पहचान के लिए भी विकसित किए जा सकते हैं जिससे पानी की जांच और भी आसान और सुलभ हो जाएगी.

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