OpenAI ChatGPT: OpenAI की एक नई रिपोर्ट से सामने आया है कि दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग अब हेल्थकेयर से जुड़े सवालों के लिए ChatGPT का सहारा ले रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, हर हफ्ते करीब 4 करोड़ यूजर्स मेडिकल और हेल्थ से जुड़ी जानकारी के लिए इस AI चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं. यानी लगभग हर चार में से एक यूजर किसी न किसी रूप में हेल्थ सपोर्ट के लिए AI पर निर्भर है.

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GPT-5 के बाद बढ़ी हेल्थ से जुड़ी पूछताछ

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि GPT-5 मॉडल के लॉन्च के बाद हेल्थकेयर से जुड़े सवालों में तेज उछाल देखने को मिला. खास तौर पर हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े विषय सबसे ज्यादा पूछे गए. इनमें प्लान की तुलना, खर्च समझना, क्लेम और बिलिंग की प्रक्रिया, पात्रता, रजिस्ट्रेशन और कवरेज जैसी जानकारियां शामिल हैं.

हर हफ्ते लाखों सवाल सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस पर

OpenAI के अनुसार, हर हफ्ते करीब 20 लाख मैसेज सिर्फ हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े सवालों पर आते हैं. कुल मिलाकर, ये सवाल ग्लोबल ChatGPT यूजर्स का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं. आंकड़े बताते हैं कि प्रति सप्ताह 16 से 19 लाख मैसेज केवल इंश्योरेंस से संबंधित क्वेरी पर भेजे जाते हैं.

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ग्रामीण इलाकों से ज्यादा सवाल

रिपोर्ट में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि हेल्थ इंश्योरेंस और मेडिकल जानकारी से जुड़े अधिकांश सवाल उन ग्रामीण और पिछड़े इलाकों से आ रहे हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं. ऐसे क्षेत्रों में लोगों के लिए मेडिकल शब्दों और प्रक्रियाओं को समझना आसान नहीं होता, इसलिए AI उनके लिए एक सहायक टूल बनकर उभरा है.

लक्षण, टर्म्स और इलाज की जानकारी है वजह

सर्वे के अनुसार, 55 प्रतिशत से ज्यादा लोग अपने लक्षणों को समझने के लिए ChatGPT से सवाल पूछते हैं. वहीं 48 प्रतिशत यूजर्स मेडिकल टर्म्स का मतलब जानने के लिए AI का सहारा लेते हैं. इसके अलावा, 44 प्रतिशत लोग इलाज के संभावित विकल्पों को समझने के लिए भी चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

डॉक्टर और मरीज के बीच की दूरी कम कर रहा AI

OpenAI का मानना है कि ChatGPT जैसे AI टूल्स उन जगहों पर खास तौर पर मददगार साबित हो रहे हैं, जहां डॉक्टरों और मेडिकल सुविधाओं की कमी है. ऐसे में यह तकनीक लोगों और हेल्थकेयर सिस्टम के बीच की दूरी को कुछ हद तक कम कर रही है.

भरोसे के साथ जरूरी है सावधानी

हालांकि, रिपोर्ट में यह चिंता भी जताई गई है कि AI पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता जोखिम भरी हो सकती है. कई बार AI गलत या अधूरी जानकारी दे सकता है जिसे AI hallucination कहा जाता है. इसलिए हेल्थ से जुड़े गंभीर मामलों में केवल AI पर भरोसा करने के बजाय विशेषज्ञ डॉक्टर या प्रोफेशनल की सलाह लेना बेहद जरूरी है.

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