अगर आप मेट्रो, ट्रेन या किसी दूसरे पब्लिक प्लेस पर स्मार्टफोन यूज करते हैं तो प्राइवेसी एक बड़ी चिंता बनी रहती है. आसपास बैठे लोग फोन की स्क्रीन में झांकते रहते हैं. इससे बचने के लिए कुछ लोग प्राइवेसी टेम्पर्ड ग्लास का यूज करते हैं. इससे उन्हें लगता है कि उनकी स्क्रीन प्राइवेट हो जाएगी. अगर आप भी उन लोगों में से हैं तो बता दें कि इस ग्लास के कई ऐसे नुकसान हैं, जिनका पता लगते ही आप इस ग्लास को हटा देंगे. आज हम आपको प्राइवेसी टेम्पर्ड ग्लास के नुकसान के बारे में ही बताने जा रहे हैं.

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डिस्प्ले की क्वालिटी पर असर

आजकल मोबाइल कंपनियां अपने फोन में AMOLED और OLED जैसे डिस्प्ले देनी लगी है ताकि यूजर्स का व्यूइंग एक्सपीरियंस शानदार हो सके. ऐसे में अगर प्राइवेसी टेम्पर्ड ग्लास लगवा लगते हैं तो डिस्प्ले की क्वालिटी पर असर पड़ता है. इस वजह से स्क्रीन पर कंटेट देखने को असली मजा नहीं रहता. प्राइवेसी टेम्पर्ड ग्लास में लगे डार्क फिल्टर के कारण आंखों को कंटेट देखने के लिए ज्यादा जोर लगाना पड़ता है, जिससे इनमें जलन और थकान जैसी दिक्कत आने लगती है.

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बैटरी लाइफ होती है कम

प्राइवेसी टेम्पर्ड ग्लास के कारण आउटडोर यूज करते समय फोन की ब्राइटनेस अधिक रखनी पड़ती है. इससे फोन की बैटरी पर अधिक लोड पड़ता है और खपत बढ़ने के कारण इसे बार-बार चार्ज करना पड़ता है. इसके अलावा लाइट सेंसर भी ठीक तरीके से काम नहीं कर पाता और ऑटो ब्राइटनेस फीचर कई बार यह नहीं समझ पाता कि उसे लाइट के आधार पर ब्राइटनेस को कितना कम या ज्यादा करना है.

फिंगरप्रिंट लगाने में आती है दिक्कत

प्राइवेसी ग्लास के कारण फिंगरप्रिंट लगाने में दिक्कत होती है. इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर वाले फोन में यह परेशानी ज्यादा आती है और इस वजह से फोन और दूसरी ऐप्स को अनलॉक करना मुश्किल हो जाता है. बार-बार ऐसा होने पर यूजर परेशान हो जाता है. इस तरह देखा जाए तो प्राइवेसी टेम्पर्ड ग्लास के कई नुकसान हैं.

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