जब से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने दुनिया में दस्तक दी है लोगों की जिंदगी पहले से थोड़ी आसान हो गई है. क्योंकि अब कई सारे काम वह AI की मदद से आसानी से कर पा रहे हैं. लेकिन जैसा कि हर बार कहा जाता है कोई भी चीज अगर अपनी हद से बाहर चली जाए तो फिर वह नुकसान देह साबित हो सकती है और ऐसा ही कुछ मामला सामने आया है AI को लेकर. 

Continues below advertisement

ChatGPT बनाने वाली मशहूर कंपनी OpenAI ने दुनिया भर की 100 से ज्यादा कंपनियों और संगठनों को एक बड़ा सुरक्षा अलर्ट भेजा है. मामला यह है कि कंपनी के एडवांस AI एजेंट्स अपनी तय सीमाओं को पार करके पूरी तरह से बेकाबू हो गए और उन्होंने बिना किसी परमिशन के कई संस्थानों के डिजिटल सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश की. तकनीक की दुनिया में इस घटना को एक बहुत बड़ी सेंधमारी के तौर पर देखा जा रहा है.

क्योंकि जिस रफ्तार से AI इंसानों की तरह खुद फैसले ले रहा है. उसने अब साइबर सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है अगर मशीनें ही खुद पर काबू खो देंगी तो हमारा डेटा कितना सुरक्षित रहेगा, जान लीजिए इस मामले को लेकर पूरी खबर. 

Continues below advertisement

एआई एजेंट्स ने क्राॅस की लिमिट खुद चलाए कमांड

OpenAI की ओर से इस मामले को लेकर कहा गया कि यह AI एजेंट नॉर्मल चैटबॉट्स की तरह सिर्फ सवाल जवाब नहीं कर रहे थे. बल्कि यह खुद से ही इंटरनेट के जारी है एक्शन ले रहे थे. इन्वेस्टिगेशन में यह बात पता चली की इन एजेंट ने बहुत सी वेबसाइट्स और सरवर को अनऑथराइज्ड कमांड भेजे. जिससे वहां गलत प्रक्रिया चलने लगी. 

इन AI एजेंट्स ने हद पार करते हुए सेफ्टी सिस्टम और फायर वाॅल को चकमा देने के लिए आपस में कांटेक्ट करना भी शुरू कर दिया और पहले से तय किए गए सेफ्टी पैरामीटर्स को पूरी तरह से बाईपास कर दिया . OpenAI ने खुद यह माना है कि उनके अपने सेफ्टी घेरे इन स्मार्ट एजेंट्स को रोकने में नाकाम साबित हुए. कंपनी ने प्रभावित संस्थानों को तकनीकी डेटा सौंप दिया है जिससे वे अपने सिस्टम में हुई इस घुसपैठ की जांच कर सकें.

डेटा चोरी का नहीं है खतरा लेकिन सेफ्टी पर सवाल

इस बड़ी घटना के सामने आने के बाद कंपनियों में डर का माहौल बन गया था कि कहीं उनका पर्सनल या सीक्रेट डेटा चोरी तो नहीं हो गया है. हालांकि OpenAI ने यह साफ किया है कि इस  अनऑथराइज्ड एक्टिविटी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि किसी यूजर का पर्सनल डेटा चोरी हुआ है या कोई भारी-भरकम हैकिंग हुई है. कंपनी के मुताबिक दिक्कत यह थी कि कुछ मामलों में उनके मॉडल्स ने इंटरनेट का इस्तेमाल ऐसे तरीकों से कर लिया जिसकी उम्मीद नहीं थी.

और शुरुआत में उन पर जैसी सख्त पाबंदियां लगनी चाहिए थीं वे नहीं लग पाई थीं.फिर भी बिना परमिशन के किसी के सिस्टम में घुसना और सेफ्टी वाॅल को पार करना अपने आप में एक बड़ा खतरा है. जुलाई में भी हगिंग फेस नाम के प्लेटफॉर्म पर ऐसी ही एक घटना सामने आई थी जहां 700 से ज्यादा एआई एजेंट्स ने अपनी लिमिट्स क्रॉस कर दीं थीं. 

यह भी पढ़ें: Zoho का बड़ा दांव, लॉन्च किया Arattai का बिजनेस वर्जन

50 पेटाबाइट डेटा की हो रही है जांच

इस पूरे घटनाक्रम के बाद ओपनएआई हरकत में आ गया है और इस समस्या की जड़ तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर छानबीन शुरू कर दी है. कंपनी इस समय लगभग 50 पेटाबाइट डेटा की बारीकी से जांच कर रही है. इसे अगर आसान भाषा में समझें तो यह डेटा इतना ज्यादा है कि अगर कोई इंसान बिना रुके दिन-रात इसे पढ़े तो उसे खत्म करने में करीब 6.6 करोड़ साल लग जाएंगे. 

इस भारी-भरकम डेटा को प्रोसेस करने के लिए हजारों मार्डन GPU सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल किया जा रहा है जिस पर रोजाना लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं. ओपनएआई अब अपनी गलतियों से सीख लेते हुए रियल-टाइम मॉनिटरिंग बढ़ा रहा है और सुरक्षा के कड़े नियम लागू कर रहा है जिससे भविष्य में कोई भी एआई एजेंट इस तरह से बेकाबू होकर कंपनियों के लिए सिरदर्द न बने.

यह भी पढ़ें: WiFi लगवाने से पहले जान लें, केबल वाला कनेक्शन बेहतर या वायरलेस?