Memory Shortage Crisis: पिछले कुछ महीनों से लैपटॉप और मोबाइल फोन महंगे हो रहे हैं. हाल ही में रिपोर्ट आई थी कि भारत में बिकने वाले 80 स्मार्टफोन मॉडल्स की कीमतें 15 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं. चिंता की बात यह है कि ग्राहकों को जल्द ही राहत मिलने की उम्मीद भी नहीं है. दरअसल, मेमोरी चिप्स की शॉर्टेज के कारण इनकी लागत बढ़ रही है, जिसका असर ग्राहकों पर पड़ रहा है. अब एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि मेमोरी चिप्स की कमी जल्द ही पूरी होती नहीं दिख रही और यह संकट अगले साल तक जारी रह सकता है. 

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कब तक जारी रहेगा Memory Shortage Crisis?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिप निर्माता कंपनियां कम से कम 2027 तक चिप्स की बढ़ती हुई डिमांड को पूरा करने के लिए अपनी कैपेसिटी नहीं बढ़ सकतीं. अभी सैमसंग, एसके हाइनिक्स और माइक्रोन तीन सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनियां हैं. इन तीनों का मार्केट शेयर करीब 90 प्रतिशत है. इनमें से माइक्रोन ने केवल एआई डेटा सेंटर के लिए चिप बनाना शुरू कर दिया है. बाकी दोनों कंपनियों ने प्रोडक्शन बढ़ाने का प्लान बनाया है. इसके बावजूद वो केवल 60 प्रतिशत डिमांड ही पूरा कर पाएंगी. इससे बाजार में चिप की कमी बरकरार रहेगी. 

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Memory Shortage Crisis के पीछे क्या वजह है?

मेमोरी चिप्स की कमी के पीछे एआई बूम को जिम्मेदार माना जा रहा है. दरअसल, मोबाइल और लैपटॉप आदि के लिए चिप्स बनाने वाली कंपनियां अब एआई डेटा सेंटर की डिमांड पूरी कर रही है. एआई कंपनियों ने इन्हें बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं, जिसके चलते कंज्यूमर मार्केट में चिप की शॉर्टेज हो गई है. इस कारण अब स्मार्टफोन कंपनियों को चिप खरीदने के लिए ज्यादा पैसे देने पड़ रहे हैं, जिसका असर कीमतों पर देखा जा रहा है. इसके अलावा ईरान युद्ध के कारण भी हालात और खराब हुए हैं और जिससे चिप के प्रोडक्शन पर और असर पड़ने की संभावना है.

कब तक सामान्य हो सकती है स्थिति?

मेमोरी चिप्स बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी सैमसंग इस साल एक नया फैब्रिकेशन प्लांट शुरू करेगी, लेकिन इसमें फुल-स्केल प्रोडक्शन अगले साल तक शुरू नहीं हो पाएगा. एसके हाईनिक्स ने भी प्रोडक्शन बढ़ाने का प्लान बनाया है, जिसके तहत कंपनी नया प्लांट शुरू करेगी. इसमें भी काम अगले साल ही शुरू हो पाएगा. इसके अलाव माइक्रोन भी 2027 में एक नया प्लांट शुरू करने की तैयारी में है. इन कोशिशों के बावजूद डिमांड पूरी होती नजर नहीं आ रही है. ऐसे में कई जानकारों का मानना है कि मेमोरी चिप का यह संकट 2027-28 तक दूर होता नहीं दिख रहा है.

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