Smartphone Price Rising: इस साल स्मार्टफोन खरीदना महंगा हो चुका है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में बिकने वाले लगभग 200 मॉडल्स में से 80 प्रतिशत मॉडल्स के दाम पहले ही बढ़ चुके हैं. इन मॉडल्स की कीमतों में 15 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है. चिंता की बात यह भी है कि ग्राहकों को जल्द राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. साल की दूसरी तिमाही में फोन की कीमत में 15 प्रतिशत की और बढ़ोतरी भी हो सकती है. यानी फोन खरीदने वाले ग्राहकों को एक और झटका लगने वाला है. आइए जानते हैं कि स्मार्टफोन की कीमतों में इजाफा क्यों हो रहा है.

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दुनियाभर में महंगे हो रहे हैं फोन

फोन की कीमतों में इजाफा केवल भारत में देखने को नहीं मिल रहा है. पूरी दुनिया में स्मार्टफोन महंगे हो रहे हैं. 2025 की आखिरी तिमाही में दुनियाभर में बेचे गए स्मार्टफोन की औसत कीमत पहली बार 400 डॉलर को पार कर गई. भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह कीमत लगभग 37,000 रुपये होती है. इसका मतलब है कि अब दुनियाभर में बिकने वाले हर फोन की एवरेज कीमत 37,000 है. एक समय पर फोन के लिए यह प्रीमियम प्राइस माना जाता था. इसके अलावा अब महंगे फोन का ट्रेंड भी आ गया है. अब लोग फोन खरीदने के लिए पहले की तुलना में ज्यादा कीमत देने को तैयार हैं.

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क्यों महंगे हो रहे हैं फोन?

अगर यह कहा जाए कि एआई बूम के कारण फोन की कीमतें बढ़ रही हैं तो गलत नहीं होगा. दरअसल, मेमोरी चिप्स बनाने वाली कंपनियां अब कंज्यूमर मार्केट के लिए चिप्स नहीं बना रही हैं. अब वो एआई कंपनियों के ऑर्डर पूरे कर रही हैं, जिन्हें डेटा सेंटर बनाने के लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप्स की जरूरत है. इसके अलावा कंज्यूमर चिप्स बनाने वाली कंपनियों ने यह काम बंद कर पूरी तरह एआई डेटा सेंटर पर फोकस कर लिया है. इस कारण स्मार्टफोन समेत दूसरे डिवाइसेस के लिए मेमोरी चिप्स की कमी हो गई है. सप्लाई कम होने के कारण मेमोरी चिप्स के दाम बढ़ गए हैं. इससे कंपनियों की लागत बढ़ी है, जिसका असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है. 

कब तक राहत मिलने की उम्मीद?

मेमोरी चिप्स की कमी का असर फोन के अलावा लैपटॉप और स्मार्ट टीवी जैसे डिवाइसेस पर भी पड़ रहा है. लेनोवो, डेल और एचपी समेत कई कंपनियां अपने लैपटॉप के दाम भी बढ़ा चुकी हैं. जानकारों का कहना है कि मेमोरी संकट अभी लंबे समय तक चल सकता है और ग्राहकों को जल्द राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

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