How Truecaller Works: ज्यादातर लोगों के फोन में Truecaller ऐप जरूर होता है, जिससे उन्हें अनजान नंबर के बारे में जानकारी मिलती है. इस ऐप की मदद से आपको कॉल करने वाले व्यक्ति का नाम और कई बार उसका पूरा पता भी दिखाई देता है. यह देखकर अक्सर लोगों के मन में सवाल आता है कि बिना उस नंबर को सेव किए Truecaller को यह जानकारी कहां से मिल जाती है? दरअसल, इसके पीछे कोई जादू नहीं, बल्कि एक बड़ा डेटाबेस और स्मार्ट टेक्नोलॉजी काम करती है. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी.
करोड़ों यूजर्स से बनता है डेटाबेस
Truecaller की सबसे बड़ी ताकत है उसका करोड़ों यूजर्स से इकट्ठा किया गया डेटा. जब भी कोई व्यक्ति अपने फोन में Truecaller ऐप इंस्टॉल करता है, तो वह अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट यानी नाम और नंबर, ऐप की परमिशन देने पर Truecaller के सर्वर के साथ सिंक कर सकता है. इस तरह Truecaller के पास लाखों-करोड़ों लोगों के नाम और नंबर का एक विशाल डेटाबेस तैयार हो जाता है.
रिपोर्ट के अनुसार, 2021 तक इस ऐप को 58 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका था और इसके डेटाबेस में लगभग 5.7 अरब अलग-अलग फोन नंबर मौजूद थे. यही वजह है कि किसी भी अनजान नंबर पर भी अक्सर कोई न कोई नाम दिख जाता है, क्योंकि बहुत मुमकिन है कि किसी दूसरे यूजर ने वह नंबर अपने फोन में सेव किया हो और Truecaller का इस्तेमाल किया हो.
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सही नाम कैसे चुनता है Truecaller?
अब सवाल यह है कि जब एक ही नंबर अलग-अलग लोगों के फोन में अलग-अलग नामों से सेव हो, तो Truecaller सही नाम कैसे चुनता है. बता दें कि इसके लिए Truecaller एक स्मार्ट तरीका अपनाता है. क्योंकि एक ही नंबर अलग-अलग लोगों के फोन में अलग-अलग नाम से सेव हो सकता है, इसलिए Truecaller का सिस्टम सबसे ज्यादा बार इस्तेमाल या दिखाई देने वाले नाम को प्राथमिकता देकर दिखाता है. कई बार बिजनेस या कस्टमर केयर जैसे नंबरों के लिए Truecaller कंपनी का नाम भी दिखाता है, क्योंकि ऐसे नंबर बड़ी संख्या में यूजर्स द्वारा पहचाने और रिपोर्ट किए जाते हैं.
पता और दूसरी जानकारी कैसे दिखती है?
घर के नाम या पते से जुड़ी जानकारी की बात करें तो यह सीधे फोन नंबर से नहीं जुड़ी होती. यह जानकारी मुख्य रूप से यूजर्स द्वारा खुद दी गई जानकारी, उनकी सहमति से सिंक किए गए कॉन्टैक्ट्स और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों से प्राप्त डेटा पर आधारित हो सकती है. Truecaller अपने डेटाबेस के लिए मुख्य रूप से ऐप इंस्टॉल के दौरान यूजर्स की अनुमति से मिले कॉन्टैक्ट डेटा, कुछ देशों की सार्वजनिक फोन डायरेक्ट्री, बिजनेस प्रोफाइल और अन्य उपलब्ध स्रोतों का उपयोग करता है. इसी वजह से कई बार किसी नंबर पर अजीब या मजाकिया नाम भी दिखाई देते हैं, क्योंकि वह नाम किसी दूसरे यूजर ने अपने फोन में उसी तरह सेव किया होता है, जरूरी नहीं कि वह उस व्यक्ति का वास्तविक नाम हो.
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