Robot on Mars: आज की टेक्नोलॉजी काफी एडवांस हो चुकी है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में अब सब कुछ संभव होता जा रहा है. एक तरफ जहां रोबोट्स के इस्तेमाल को इंसानों के लिए खतरा माना जा रहा है तो वहीं दूसरी तरफ, एआई रोबोट को दूसरे ग्रह पर भेजने की तैयारी हो रही है. जी हां, दरअसल, वैज्ञानिकों ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो अब इंसानों से पहले ही मंगल ग्रह पर पर पहुंच सकता है.

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इस जीव से प्रेरित होकर तैयार हुआ रोबोट

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों ने इंचवर्म (Inchworm) यानी एक छोटे कीड़े से प्रेरित होकर एक बेहद छोटा और पूरी तरह सॉफ्ट रोबोट तैयार किया है. आगे आने वाले समय में ये रोबोट क्षतिग्रस्त सीवर पाइपों की जांच करने, खतरनाक इलाकों में खोजबीन करने और यहां तक कि मंगल ग्रह पर जाकर काम खोजबीन करने में भी काम आ सकता है.

 इंचवर्म की तरह रेंगकर बढ़ता है आगे

आर्टिफिशियल मांसपेशी को इस आकार में तैयार किया गया है जिससे ये बार-बार लंबी और छोटी हो सके. इसके दोनों ओर के बीच एक लचीला प्लास्टिक आर्च लगाया गया जिसने रोबोट को स्पेशल खांचे वाली जगहों पर इंचवर्म की तरह रेंगने में सक्षम बनाया.

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टेस्ट के दौरान हर बार बिजली मिलने पर रोबोट लगभग 10 प्रतिशत तक फैलता था और फिर वापस सिकुड़ जाता था. इसी प्रोसेस को बार-बार किया गया और रोबोट धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा.

किन चीजों से बना रोबोट

जानकारी के मुताबिक, आज कल के नॉर्मल रोबोट्स में मेटल, मोटर जैसे चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन ये रोबोट इनसे बिलकुल अलग है. दरअसल, इसे पूरी तरह लचीले मटेरियल से तैयार किया गया है और इसमें कोई हार्ड हिस्सा मौजूद नहीं है. इसी वजह से ये रोबोट बहुत ही सॉफ्ट, हल्का और फ्लेक्सिबल है. इस रोबोट की सबसे बड़ी खास बात ये है कि ये संकरी जगहों से गुजरने और ऊबड़-खाबड़ जगहों पर चलने के लिए तैयार किया गया है.

मंगल ग्रह पर हो सकता है इस्तेमाल

वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में इस रोबोट में छोटा कैमरा और अन्य सेंसर भी लगाए जा सकते हैं. इससे यह किसी दूसरे ग्रह जाकर वहां की जानकारी लाने का काम आसानी से कर सकेगा. इसीलिए माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस रोबोट को मंगल ग्रह पर भेजा जा सकता है.

इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसका सरल डिजाइन है. जहां एक तरफ नॉर्मल रोबोट कई मोटरों और मुश्किल टेक्निकल चीजों पर निर्भर रहता हैं, वहीं ये केवल एक आर्टिफिशियल मांसपेशी के जरिए चलता है. टेस्टिंग के दौरान यह रोबोट लगातार चार महीने से अधिक समय तक रोजाना करीब चार घंटे तक बिना किसी दिक्कत के काम करता रहा.

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