Cyberfraud: फिलिपींस में पुलिस द्वारा की गई एक छापेमारी के दौरान साइबर फ्रॉड गिरोह के ठिकाने से एक चौंकाने वाला दस्तावेज़ बरामद हुआ. यह कोई साधारण कागज़ नहीं बल्कि ठगों के लिए लिखा गया एक पूरा हैंडबुक था जिसमें विस्तार से बताया गया था कि किसी व्यक्ति को कैसे भावनात्मक रूप से तैयार किया जाए और फिर उससे पैसे ऐंठे जाएं.

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मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस मैनुअल में चीनी भाषा में लिखे निर्देश थे जिनमें ठगी को सेल और पीड़ित को “क्लाइंट” कहा गया था. एक लाइन में लिखा था कि जब भावनाएं कंट्रोल में आ जाती हैं तो पैसा अपने आप आ जाता है. यही सोच इन गिरोहों की पूरी रणनीति की नींव है.

रोमांस स्कैम

एक दूसरा दस्तावेज, जो अंग्रेज़ी और चीनी दोनों भाषाओं में था, रोमांस स्कैम पर केंद्रित था. इसमें बताया गया था कि कैसे किसी को प्रेम संबंध का भरोसा दिलाकर फर्जी निवेश में पैसा लगवाया जाए. इस तरह की ठगी को अपराधी आपस में “पिग-बुचरिंग” कहते हैं यानी शिकार को धीरे-धीरे तैयार करना और फिर एक झटके में सब कुछ छीन लेना.

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FBI के मुताबिक यह आज के समय की सबसे तेज़ी से फैलने वाली साइबर ठगी में से एक है. Reuters की जांच में यह भी सामने आया कि दक्षिण-पूर्व एशिया में ऐसे कई स्कैम सेंटर हैं, जहां मानव तस्करी के शिकार लोगों से जबरन यह काम करवाया जाता है.

AI ने ठगी को और खतरनाक बना दिया

इन घोटालों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने और भी खतरनाक बना दिया है. अब ठग फर्जी फोटो, नकली वीडियो कॉल, ऑटोमैटिक चैट और रियल-टाइम भाषा अनुकूलन जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं जिससे उनका झूठ बेहद असली लगता है. बरामद हुए दोनों मैनुअल यह दिखाते हैं कि ठगों के पास अब सिर्फ बहाने नहीं बल्कि पूरी साइकोलॉजिकल रणनीति होती है.

नकली पहचान गढ़ने से होती है शुरुआत

हर पिग-बुचरिंग स्कैम की पहली सीढ़ी होती है एक परफेक्ट नकली पहचान बनाना. मैनुअल के मुताबिक, यह पहचान इतनी विश्वसनीय होनी चाहिए कि सामने वाला बिना सवाल किए भरोसा कर ले.

ठग खुद को डॉक्टर, वकील, इंजीनियर या किसी बड़ी कंपनी में मैनेजर बताने की सलाह दी जाती है. महिला शिकार के लिए अक्सर अधिकार और सुरक्षा का भ्रम रचा जाता है.

झूठ की मजबूत नींव कैसे रखी जाती है

मैनुअल में फर्जी प्रोफाइल के लिए कुछ बातें हमेशा एक-सी रखने को कहा गया है जैसे जन्मदिन, परिवार की कहानी और पेशा. उदाहरण के तौर पर, खुद को तलाकशुदा बताना, एक बच्ची होने की कहानी गढ़ना और विदेश में काम करने का दावा करना.

इसके बाद कुछ बातें शिकार के हिसाब से बदली जाती हैं जैसे उम्र, रहन-सहन, और पारिवारिक बैकग्राउंड ताकि दोनों के बीच कॉमन कनेक्शन बन सके.

छोटे-छोटे विवरण जो कहानी को सच बना देते हैं

ठगों को सिर्फ बायोडाटा याद नहीं रखना होता, बल्कि अपनी नकली ज़िंदगी जीनी पड़ती है. किस तरह का घर है, कौन-सी कार चलाते हैं, कौन-से शौक हैं सब कुछ रटा हुआ. तैराकी, कुकिंग, ट्रैवल और किताबें पढ़ने जैसे शौक इसलिए चुने जाते हैं क्योंकि ये सामान्य और भरोसेमंद लगते हैं.

पहला मैसेज और भरोसे की शुरुआत

मैनुअल में पहले दिन के लिए शब्दशः मैसेज दिए गए हैं साधारण, विनम्र और दोस्ताना. शुरुआती बातचीत का मकसद यह जानना होता है कि सामने वाला पहले ठगी का शिकार तो नहीं हुआ और पैसों या निवेश में उसकी रुचि कितनी है. इसके बाद फोन कॉल आती है, जहां भावनात्मक जुड़ाव की नींव रखी जाती है.

हर इंसान के लिए अलग जाल

मैनुअल बताता है कि हर शिकार एक जैसा नहीं होता. किसी को हल्के मज़ाक से पास लाया जाता है, किसी को तारीफों से, तो किसी को अकेलेपन की सहानुभूति देकर. मिडिल-एज महिलाओं को जीवन की छोटी परेशानियों पर बात करके फंसाने की सलाह दी गई है क्योंकि अक्सर वे खुद को अनसुना महसूस करती हैं.

बचपन और रिश्तों से निकाली जाती है कमजोरी

ठग यह भी समझने की कोशिश करते हैं कि सामने वाला बचपन में कैसा रहा बहुत लाड़-प्यार मिला या मुश्किलों में पला. उसी के अनुसार व्यवहार बदला जाता है. कम आत्मविश्वास वाले लोगों को लगातार गाइडेंस और तारीफ दी जाती है जबकि आत्मनिर्भर लोगों के साथ बराबरी का रिश्ता दिखाया जाता है.

सात दिन में पूरा खेल

सबसे डराने वाली बात यह है कि यह ठगी सात दिन के भीतर पूरी की जा सकती है. दूसरे दिन निवेश की बात शुरू होती है, पांचवें दिन प्यार का रिश्ता तय होता है और सातवें दिन फर्जी प्लेटफॉर्म पर पैसा लगवाया जाता है. अगर कोई शिकार जल्दी भावनात्मक रूप से नहीं जुड़ता, तो मैनुअल साफ कहता है उसे छोड़ दो और अगले लक्ष्य पर बढ़ो.

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