1 TON AC: गर्मी बढ़ते ही सबसे पहला ख्याल एसी खरीदने का आता है. लेकिन ठंडी हवा के साथ-साथ बिजली बिल भी तेजी से बढ़ सकता है. इसलिए 1 टन AC लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह हर घंटे कितनी बिजली खर्च करता है और महीने के बिल पर उसका कितना असर पड़ेगा.

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1 टन AC का मतलब क्या होता है?

सबसे पहले यह जान लें कि 1 टन का मतलब वजन नहीं बल्कि कूलिंग क्षमता से है. 1 टन AC लगभग 12000 BTU प्रति घंटे की कूलिंग देता है जो छोटे कमरे (लगभग 100-120 वर्ग फुट) के लिए पर्याप्त मानी जाती है. लेकिन इसकी बिजली खपत कई बातों पर निर्भर करती है जैसे स्टार रेटिंग, इन्वर्टर या नॉन-इन्वर्टर टेक्नोलॉजी और कमरे का तापमान.

हर घंटे कितनी यूनिट खपत?

आमतौर पर 1 टन का नॉन-इन्वर्टर AC लगभग 0.9 से 1.2 यूनिट (kWh) बिजली प्रति घंटे खर्च कर सकता है. यानी अगर आप इसे रोज 8 घंटे चलाते हैं तो एक दिन में करीब 8 से 9 यूनिट बिजली खपत हो सकती है.

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वहीं 5-स्टार इन्वर्टर AC की खपत कम होती है. यह औसतन 0.6 से 0.8 यूनिट प्रति घंटे तक सीमित रह सकता है क्योंकि इन्वर्टर टेक्नोलॉजी जरूरत के अनुसार कंप्रेसर की स्पीड एडजस्ट करती है.

महीने का बिल कैसे बढ़ता है?

मान लीजिए आपका AC रोज 8 घंटे चलता है और औसतन 1 यूनिट प्रति घंटे की खपत करता है. तो महीने में लगभग 240 यूनिट बिजली खर्च हो सकती है. अगर प्रति यूनिट दर 7 रुपये है तो सिर्फ AC से करीब 1680 रुपये का बिल बन सकता है. इसमें अन्य घरेलू उपकरणों की खपत अलग से जुड़ती है.

किन बातों से बदलता है खर्च?

बिजली खपत केवल टन क्षमता पर निर्भर नहीं करती. अगर कमरा धूप में है, दरवाजे-खिड़कियां खुली रहती हैं या तापमान 18 डिग्री पर सेट किया गया है तो AC ज्यादा मेहनत करेगा और बिजली ज्यादा खर्च होगी. 24-26 डिग्री पर तापमान सेट करने से खपत कम की जा सकती है.

खरीदने से पहले क्या देखें?

AC खरीदते समय केवल कीमत न देखें. स्टार रेटिंग, इन्वर्टर टेक्नोलॉजी और सालाना बिजली खपत (Annual Energy Consumption) जरूर जांचें. शुरुआत में महंगा लगने वाला 5-स्टार इन्वर्टर मॉडल लंबे समय में बिजली बिल कम कर सकता है.

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