अगर आप हर साल नया iPhone खरीदने या पुराने फोन को बदलकर लेटेस्ट मॉडल लेने वालों में से हैं तो Apple का नया Apple Upgrade Program आपके लिए एक अलग ऑप्शन पेश करता है. इसमें फोन को पूरी कीमत देकर खरीदने के बजाय मंथली पेमेंट पर इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, हर साल अपग्रेड करने वालों के लिए खरीदना और लीज पर लेना दोनों के फायदे और नुकसान अलग हैं.

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iPhone खरीदने का सीधा मतलब है कि फोन आपका हो जाता है. आप उसे लंबे समय तक इस्तेमाल कर सकते हैं, बाद में बेच सकते हैं या किसी दूसरे व्यक्ति को दे सकते हैं. वहीं Lease में आप तय पीरियड तक फोन इस्तेमाल करने के लिए मंथली पेमेंट करते हैं. Apple के नए Upgrade Program में iPhone के लिए 12 या 24 महीने की पीरियड उपलब्ध है. समय पूरा होने पर यूजर के पास नया डिवाइस लेने, फोन वापस करने या तय खरीद ऑप्शन के तहत उसे अपने पास रखने का ऑप्शन होता है.

हर साल iPhone बदलते हैं तो Lease कैसे काम करता है?

आपको बता दें कि मान लीजिए कोई यूजर हर साल नया iPhone लेना चाहता है. खरीदने की कंडिशन में उसे नया फोन खरीदना होगा और पुराने फोन को बेचने या ट्रेड-इन करने के प्रोसेस से गुजरना पड़ेगा. पुराने फोन की रीसेल वैल्यू से नए मॉडल की लागत कुछ कम होती है.

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Lease में शुरुआत में पूरी कीमत देने की जरूरत नहीं होती है. आप हर महीने पेमेंट करते हैं और तय अवधि के बाद फोन अपग्रेड कर सकते हैं. इससे एक साथ बड़ी रकम खर्च करने से बचा जा सकता है. हालांकि, लगातार Lease लेते रहने पर आप हर साल पेमेंट करते रहेंगे और फोन के मालिक नहीं बनेंगे.

फोन अपने पास रखना है तो क्या करें?

अगर आपका प्लान iPhone को कई साल इस्तेमाल करने का है तो खरीदना ज्यादा सीधा ऑप्शन है. Apple Upgrade Program में Lease का समय पूरा होने के बाद फोन खरीदने का ऑप्शन मिलता है. खरीद की रकम पहले किए गए Lease पेमेंट के आधार पर तय होती है.

यानी Lease चुनने का मतलब यह नहीं है कि फोन हमेशा के लिए Apple का ही रहेगा. लेकिन अगर आखिर में उसे खरीदना ही है तो शुरुआत से खरीदने और Lease के बाद खरीदने की कुल लागत का मुकाबला करना जरूरी है.

Lease के साथ एक और खर्च का ध्यान रखें

नए Apple Upgrade Program में AppleCare+ पहले की तरह डिफॉल्ट रूप से शामिल नहीं है. इसे अलग से लेना पड़ सकता है. फोन खोने या चोरी होने की कंडिशन में भी यूजर को Lease खत्म करने या फोन खरीदने से जुड़ी एक्सट्रा लागत का सामना करना पड़ सकता है.

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