Dark Vs Light Mode: घर हो या ऑफिस, आजकल लोग ज्यादातर समय स्क्रीन के आगे ही रहते हैं. स्क्रीन देखने का वैसे कोई नुकसान नहीं है, लेकिन अगर घंटों तक इसके सामने बैठे रहने से आंखों में थकान और जलन जैसी दिक्कतें होने लगती हैं. इससे बचने के लिए कई लोग अपने डिवाइस पर डार्क मोड को यूज करते हैं. लाइट मोड में जहां लाइट बैकग्राउंड पर डार्क टेक्स्ट दिखते हैं, वहीं डार्क मोड में बैकग्राउंड डार्क और टेक्स्ट लाइट हो जाते हैं. लेकिन क्या लाइट या डार्क मोड सेलेक्ट कर लेने से आंखों पर पड़ने वाला असर कम हो जाता है? आइए जानते हैं कि आंखों की सेहत के लिए डिवाइस का कौन-सा मोड ठीक रहता है. 

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Dark Vs Light Mode: कौन-सा बेहतर है?

इस सवाल का जवाब है कि कोई भी मोड एक-दूसरे से बेहतर नहीं है. इनके फायदे और नुकसान आसपास की लाइटिंग और यूजर के विजन पर डिपेंड करते हैं. मसलन अगर किसी व्यक्ति की दूर की नजर कमजोर है तो उसके लिए डार्क मोड मुश्किल खड़ी कर सकता है. 

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कब अच्छा और कब खराब है Dark Mode?

कम रोशनी वाली कंडीशन में आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लाइट आ सके. इसलिए अगर अंधेरे में लाइट मोड वाली वाली स्क्रीन को लगातार लंबे समय तक देखा जाए तो आंखों में दर्द होना शुरू हो सकता है. ऐसी स्थिति में डार्क मोड काम आता है, जो स्क्रीन और रूम की लाइट के बीच कंट्रास्ट को कम कर देता है तो आंखों के लिए देखना सहज हो जाता है. वहीं अगर किसी कमरे में पूरी रोशन है तो पुतलियां सिकुड़ जाती है. इस कारण डेप्थ ऑफ फील्ड कम हो जाता है. इस कारण आंखों के लिए टेक्स्ट पर फोकस कर पाना मुश्किल हो जाता है. इससे कई बार टेक्स्ट ब्लर नजर आने लगते हैं.

Light Mode को ऐसे यूज करने पर नहीं आएगी दिक्कत

लाइटिंग के हिसाब से डार्क मोड आंखों के लिए मुश्किल हो सकता है. वहीं अगर आप कुछ टिप्स के साथ लाइट मोड यूज करते हैं तो आंखों पर ज्यादा असर नहीं डालेगा. लाइट मोड की ब्राइटनेस कम करने से ग्लेयर कम हो जाता है, जो आंखों के लिए अच्छा है. आजकल मॉडर्न फोन में ऑटो-ब्राइटनेस का ऑप्शन मिलता है, जो एम्बिएंट लाइट के हिसाब से ब्राइटनेस को एडजस्ट कर देता है. इसके अलावा आप नाइट मोड भी यूज कर सकते हैं, जो स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट को कम कर देता है. 

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