AI Robot In China: अब तक AI को सिर्फ दिमागी कामों तक सीमित माना जाता था लेकिन अब मशीनें शारीरिक ताकत में भी इंसानों को टक्कर देने लगी हैं. चीन में हुई एक हाफ मैराथन रेस ने इस धारणा को बदलकर रख दिया. चीन की राजधानी बीजिंग में 21.1 किलोमीटर की हाफ मैराथन में 100 से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट्स ने हिस्सा लिया.

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इन रोबोट्स ने इंसानों के साथ ही रेस पूरी की हालांकि दोनों के ट्रैक अलग-अलग रखे गए थे ताकि तुलना सही तरीके से हो सके. हैरानी की बात ये रही कि कई रोबोट्स ने न सिर्फ रेस पूरी की बल्कि शानदार टाइमिंग भी हासिल की.

रोबोट ने मारी बाजी

इस रेस में सबसे तेज प्रदर्शन एक रोबोट ने किया जिसे Honor कंपनी ने तैयार किया था. इस रोबोट ने सिर्फ 50 मिनट 26 सेकंड में रेस पूरी कर ली जबकि सबसे तेज इंसानी धावक ने 1 घंटे 7 मिनट 47 सेकंड में फिनिश लाइन पार की. हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस तुलना को सीधे तौर पर इंसानों से बराबरी में नहीं रखा जा सकता क्योंकि परिस्थितियां अलग थीं.

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पिछले साल से बड़ा सुधार

पिछले साल ऐसी ही रेस में कई रोबोट्स संतुलन खो बैठे थे या बीच में ही रुक गए थे. लेकिन इस बार टेक्नोलॉजी में बड़ा सुधार देखने को मिला. इस बार ज्यादातर रोबोट्स ने बेहतर बैलेंस, स्पीड और स्टैमिना दिखाया और बिना ज्यादा परेशानी के रेस पूरी की.

AI और सेंसर से मिली ताकत

करीब 40% रोबोट्स पूरी तरह ऑटोनॉमस थे यानी वे खुद ही सेंसर और AI की मदद से रास्ता समझ रहे थे, संतुलन बना रहे थे और अपनी चाल को एडजस्ट कर रहे थे. जो रोबोट रिमोट कंट्रोल से चलाए गए, उन्हें समय में पेनल्टी दी गई. इसके अलावा बैटरी बदलने पर भी अतिरिक्त समय जोड़ा गया.

अभी भी बाकी हैं चुनौतियां

इतनी शानदार परफॉर्मेंस के बावजूद रोबोट्स अभी पूरी तरह परफेक्ट नहीं हैं. रेस जीतने वाला रोबोट भी फिनिश लाइन के पास हल्का सा असंतुलित हुआ जो बताता है कि तकनीक को अभी और बेहतर बनाने की जरूरत है.

इंसानों जैसी चाल कैसे बनी?

इंजीनियर्स ने इन रोबोट्स को इस तरह डिजाइन किया है कि उनकी मूवमेंट इंसानों जैसी लगे. रोबोट के पैरों की लंबाई और स्ट्रक्चर को इस तरह बनाया गया है कि उनकी चाल ज्यादा प्रभावी हो, ठीक वैसे ही जैसे प्रोफेशनल रनर्स की होती है. इसके अलावा, लंबे समय तक दौड़ने के दौरान गर्मी से बचाने के लिए लिक्विड कूलिंग सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया.

भविष्य की झलक

इस रेस ने साफ दिखा दिया कि AI और रोबोटिक्स कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. हालांकि, असली दुनिया में काम करना अभी भी रोबोट्स के लिए चुनौतीपूर्ण है खासकर जहां तेजी से फैसले लेने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की जरूरत होती है.

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