शिक्षक की भूमिका समाज की तस्वीर बदलने के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानी जाती है और इसकी शुरुआत शिक्षा के मंदिर विद्यालय से होती है. लेकिन अगर एक शिक्षक को ही उसके विद्यालय से दूर रखकर किसी अन्य व्यवस्थाओं में शामिल कराया जाएगा तो यह बच्चों के भविष्य के साथ-साथ समाज का भी बहुत बड़ा नुकसान होगा. दरअसल, वाराणसी के ही विद्यालय से यह जानकारी मिली है कि शिक्षकों की ड्यूटी अलग-अलग सरकारी कार्यक्रम में लगने की वजह से बोर्ड और प्री बोर्ड परीक्षा की तैयारी पर सीधा असर पड़ रहा है. एबीपी न्यूज की टीम जब इस विषय की पड़ताल के लिए वाराणसी के एक इंटर कॉलेज पहुंची तो वहां के  शिक्षक ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि - प्री बोर्ड और बोर्ड परीक्षाएं बिल्कुल नजदीक हैं. पूरे साल में यह अवधि किसी बोर्ड अभ्यर्थी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है. लेकिन हैरानी की बात यह है कि वाराणसी में आयोजित हो रहे एक खेल आयोजन के लिए विज्ञान गणित अंग्रेजी के शिक्षकों की भी ड्यूटी लगा दी गई है.

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खेल कार्यक्रम में गणित, विज्ञान के शिक्षकों का क्या काम?

पूर्व में भी वाराणसी जनपद में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें शिक्षकों की ड्यूटी लगी और इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है. स्वाभाविक है, खेल संस्कृति कला से जुड़े लोग शामिल हो सकते हैं लेकिन खेल कार्यक्रम में विज्ञान गणित और अंग्रेजी के शिक्षकों को व्यवस्थाओं के लिए शामिल करना बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है. शिक्षक का यह भी कहना था कि सिर्फ इसी समय नहीं बल्कि पूर्व में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम अथवा अलग-अलग सरकारी कार्यक्रम में अच्छी संख्या में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई.

6 जनवरी से शुरू हो  रहे हैं प्री बोर्ड एग्जाम

शिक्षक ने चिंता जताते हुए यह भी कहा कि 6 जनवरी से प्री बोर्ड की परीक्षाएं शुरू हो रही है. इसी बीच वाराणसी में 4 से 11 जनवरी तक एक बड़ा खेल आयोजन है इसमें जिले के करीब 2 दर्जन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है. इनमें सबसे ज्यादा इसमें गणित, विज्ञान और अंग्रेजी के शिक्षक हैं जो खासतौर पर प्री बोर्ड और बोर्ड परीक्षा के दौरान विद्यालय में उनकी उपस्थित छात्रों के मार्गदर्शन के लिए बेहद आवश्यक है.

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कार्यक्रम में ड्यूटी लगाने के शिक्षक कराते हैं पैरवी

सबसे हैरानी वाली बात कि कुछ शिक्षकों द्वारा भी ऐसे कार्यक्रम में शामिल होने के लिए विद्यालय में ठोस पैरवी करवाई जा रही है, जिसमें शासन से लेकर शीर्ष पद पर बैठे हुए लोगों तक से फोन करवा कर आयोजन कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कहा जाता है. जिससे उन्हें उस अवधि तक विद्यालय न आना पड़े. ऐसे में देखना होगा कि बच्चों के भविष्य से जुड़े हुए इस बेहद गंभीर विषय को लेकर सरकार की तरफ से ठोस निर्णय लिया जाता है या नहीं.