बीते सप्ताह उत्तर प्रदेश के कई जनपद बाढ़ की चपेट में रहे. इसका असर धर्म नगरी काशी में भी देखा गया, जहां प्रमुख नदी गंगा और वरुणा भी ऊफान पर रही. वाराणसी में गंगा के जलस्तर ने खतरे के निशान को भी पार कर लोगों को डरा दिया था. गंगा घाट पूरी तरह जलमग्न थे, मंदिर से लेकर भवनो के प्रथम तल पूरी तरह डूब गए  थे.

फिलहाल अब गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के नीचे है. पानी सीढ़ियों से नीचे उतरकर अपने सामान्य स्तर पर पहुंच रहा है, लेकिन अभी भी काशी के घाटों पर चुनौतियां कम नहीं हुई हैं.

मंदिरों और घाटों पर सफाई जारी है

वाराणसी के गंगा घाट के मौजूदा स्थिति पर नजर डाले तो अब गंगा का  जलस्तर लगातार सामान्य की ओर बढ़ रहा है. चेतावनी बिंदु के नीचे गंगा का जलस्तर है. वहीं बाढ़ की वजह से घाटों के सीढ़िओ सहित सतह पर कीचड़ मिट्टी लगा हुआ है. इसको साफ करने का कार्य किया जा रहा है. वहीं गंगा घाट पर स्थित मंदिर भवनो से पानी निकलने के बाद सेवादारों द्वारा पंप की मदद से सफाई की जा रही है.

अब धीरे-धीरे घाट पर पंडा और पुजारीयों का आसन लगने लगा है. मंदिर के घंटो की आवाज सुनाई देने लगी है. हालांकि अभी भी युद्ध स्तर पर कीचड़ हटाने के लिए कार्य करने की जरूरत है, तभी एक घाट से दूसरे घाट सामान्य रूप से आवागमन शुरू हो सकेगा. अभी भी विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती परिवर्तित स्थान पर ही संपन्न कराई जा रही है.

 नौका संचालन पर अभी भी रोक

वाराणसी के गंगा घाट पर पर्यटकों की चहलकदमी में अभी कुछ खास वृद्धि नहीं देखी गई है, लेकिन आने वाले सप्ताह में संभावना जताई जा रही है की गंगा घाट पर पूरी तरह सफाई होने के बाद एक बार फिर पर्यटकों का आना शुरू हो जाएगा. फिलहाल अभी नौका संचालन पर रोक है. घाटों के मंदिरों और भवन में तेजी से सफाई की जा रही है. निश्चित ही गंगा का जलस्तर जैसे-जैसे सामान्य हो रहा है वैसे वैसे घाटों की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों में भी वृद्धि देखी जा रही है.